पाक-चीनी खुफिया एजेंसियों ने आर्मी अफसरों को फंसाने के लिए तैयार की खूबसूरत लड़कियां

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इंडियन आर्मी के अधिकारी हनी-ट्रैप में फंस सकते हैं। इसके लिए पाकिस्तानी औऱ चीनी खुफिया एजेंसियों ने बड़ा जाल बिछाया है। इस काम में खूबसूरत और जासूसी में माहिर लड़कियों की मदद ली जा रही है। खास बात ये है ऐसी महिलाएं शानदार उर्दू-अंग्रेजी और हिंदी तो बोलती ही हैं, साथ ही अपने हुस्न के जाल में अच्छे अच्छे अधिकारियों को फांसने के लिए बाकायदा ट्रेंड भी की गई हैं।

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक भारतीय खुफिया एंजेंसियों ने इस संभावित हनी-ट्रैप के मामलों से निपटने के लिए अधिकारियों को अलर्ट भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अगर अनजान खूबसूरत महिलाएं आपसे संपर्क बढ़ा रही हैं और आपको प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं, तो ये हनी-ट्रैप में फंसाने का मामला हो सकता है। ऐसे मामलों से उन्हें दूर रहने को कहा गया है।

खुफिया एंजेसियों द्वारा जारी अलर्ट के मुताबिक ऐसी महिलाएं शारीरिक संबंध बनाने से भी नहीं कतराती हैं। और वो इसका फायदा उठाकर अधिकारियों को जाल में फंसाने के बाद खुफिया सूचनाएं लेकर चंपत हो जाती हैं। ऐसे अधिकारी किसी के सामने मुंह भी नहीं खोल पाते कि वो किस तरह हुस्न के जाल में फंसकर अपने ही देश की खुफिया सूचनाएं दुश्मन के साथ साझा कर चुके हैं। इसके बाद उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर दुश्मन खुफिया एजेंसिया लगातार काम निकालती रहती हैं।

सूत्रों का कहना है कि खुफिया एजेंसियां ऐसे मामलों से बचने के लिए अधिकारियों को जागरूक कर रही हैं, ताकि दुश्मन के जाल में आने से बचा जा सके।

रिपोर्ट के मुताबिक चीनी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां हमारे अधिकारियों की आदतों पर भी नजर रख रही हैं। इसके अलावा चीनी कंपनियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले इंडियन आर्मी ऑफिसर्स उनके खास रेडार में हैं। इसके अलावा पॉर्न साइटों पर जाने के आदी ऑफिसर्स जब किसी महिला से संपर्क साधते हैं, वो भी चीनी खुफिया एजेंसियां रिकॉर्ड कर रही हैं, ताकि किसी भी तरह से उनतक पहुंचा जा सके।

खास बात ये है कि पॉर्न साइट पर संपर्क बनते ही उर्दू-चीनी बोलने में माहिर खूबसूरत महिलाएं उनसे वॉट्सऐप-फेसबुक के जरिए संपर्क साधती हैं। ऐसी महिलाएं उन्हें खूबसूरत उर्दू शायरी और हिंदी कविताओं के माध्यम से भावनात्मक तौर पर घेरती हैं और थोड़े ही समय में उनसे फोन पर संपर्क कर मुलाकात करती हैं औऱ फिर शुरू हो जाता है वो खेल, यानि जासूसी-जिसके लिए ये जाल बुना गया होता है।

ऐसे मामलों में अगर कुछ अधिकारियों को शक भी होता है, तो उन्हें ब्लैकमेल कर चुप करा दिया जाता है। खुफिया एजेंसियां ऐसे मामलों से निपटने के लिए ही जागरुकता अभियान चला रही हैं।

source-DJ