योगी के आदेश पर गोमती रिवर फ्रंट की जांच शुरू, जांच में काफी लोगो के डूबने के उम्मीद

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोमती रिवर फ्रंट की जांच के आदेशं देने के बाद अब जांच शुरू हो गयी, गोमती रिवर फ्रंट में अभियंताओं ने रिवर फ्रंट में पानी की तरह पैसा बहाया गया है।

सिंचाई विभाग ने नदी की गाद निकालने में ही 54 करोड़ खर्च कर दिया। पक्का पुल से निशातगंज के बीच गाद निकालने का दावा किया गया था। गाद भी निकाली गई लेकिन अब उसे निकालने की जो रकम खर्च दिखाई जा रही है, वह किसी के गले से नहीं उतर रही है। अनुपयोगी कार्य को कराकर सत्ता से जुड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने में जुटे सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने गोमती पर बनी डायाफ्राम वॉल के पीछे की एंकर दीवार बनाने में भी लापरवाही की थी। यह दीवार सुरक्षा के लिए बनाई जानी थी। कुल डायाफ्राम वाल (दोनों तट पर) 15.8 किलोमीटर में बनाई थी, लेकिन 900 मीटर की एंकर दीवार नहीं बन पाई थी। इसके लिए डायाफ्राम वाल के पीछे मिट्टी निकालने में लापरवाही बरती थी।

गोमती रिवर फ्रंट की खूबसूरती निखारने के लिए रंग-बिरंगी फव्वारे को करोड़ों रुपये लगाकर बाहर से मंगाया गया। एक फव्वारे की कीमत करीब 45 करोड़ बताई जा रही है। दरअसल पूरा प्रोजेक्ट ही अब सवालों के घेरे में है। अब देखना है कि जब आयोग अपनी जांच शुरू करेगा तो किन अफसरों और ठेकेदारों की गर्दन फंसेगी।

गोमती रिवर फ्रंट परियोजना के लिए पहले 656 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित की गयी थी लेकिन, बाद में बढ़ाकर इसकी पुनरीक्षित लागत 1513 करोड़ रुपये कर दी गई। मुख्यमंत्री ने अपने दौरे में जब अधिकारियों से बातचीत की तो पता चला कि बढ़ी लागत में भी 95 प्रतिशत धन खर्च हो जाने के बावजूद परियोजना का 60 फीसद कार्य ही पूरा हो सका है। इसके अलावा गोमती नदी के जल को प्रदूषण मुक्त करने के बजाय अनेक गैर जरूरी कार्यों पर अत्यधिक धनराशि खर्च की गई है। इन कार्यों को पूरा करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन न किये जाने की भी शिकायतें मिली हैं। इस में अब बड़े बड़े लोगो पर गाज गिरने के आसार है।