राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर उंगली उठाते हैं कि सांप्रदायिकता फैला रहे हैं, जो वोट बैंक बनाकर समाज को बांटते हैं वो खुद को मानवतावादी कहते हैं

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रविवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सुहेलदेव विजयोत्सव दिवस के कार्यक्रम में कहा- ”राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर लोग उंगली उठाते हैं कि वो सांप्रदायिकता फैला रहे हैं। इस देश में एक बार चर्चा हो जानी चाहिए कि कौन सांप्रदायिक है और कौन राष्ट्रवादी है। जो लोग वोट बैंक बनाकर समाज को बांटने का काम कर रहे हैं वो खुद को मानवतावादी कहते हैं।”

योगी ने कहा, ”हमने अपने इतिहास को भुला दिया। इस देश में विदेशी आक्रांताओं के हमले तेज हो गए। जब भी हम अपने इतिहास को भुला देंगे इसका परिणाम पूरे समाज को भुगतना होगा। महाराजा सुहेलदेव को इतिहास में जितनी जगह मिलनी चाहिए थी उतनी मिली नहीं। एक शरारत के तहत ऐसे महापुरुषों का नाम हटा दिया गया। भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि इन सभी महापुरुषों को पाठयक्रमों का हिस्सा बनाएंगे। जब तक हम बच्चों को नहीं बताएंगे कि कौन महापुरूष थे तो उन्हें जानकारी क्या होगी।”

योगी ने कहा, ”इतिहास को तोड़ मरोड़ करके अपने फायदे के लिए उसे इस्तेमाल किया गया। आजादी के बाद से ही इस प्रकार की शरारत शुरू हो गई थी। हमारी आजादी की लड़ाई को विरोध बताने की शरारत चल रही थी। जिन लोगों ने यह शरारत की है उन्हें एक्सपोज करने की आवश्यकता है। आज आरएसएस निस्वार्थ भावन से काम कर रहा है। आरएसएस लोगों के अंदर राष्ट्रीयता का भाव पैदा करना चाहता है। जब आरएसएस मलिन बस्ती में काम करता है तो उसपर उंगली उठती है कि वो सांप्रदायिक है।”

योगी ने कहा, ”इस देश के अंदर सांप्रदायिकता पर एक चर्चा होनी चाहिए, पता चल जाए कौन सांप्रदायिक है और कौन राष्ट्रवादी। जो भारत को कश्मीर से कन्या कुमारी तक एक राष्ट्र के तौर पर देखते हैं उन्हें सांप्रदायिक कहा जाता है और जो लोग वोट बैंक बनाकर समाज को बांटने का काम कर रहे हैं वो खुद को मानवतावादी कहते हैं। इन लोगों को सांप्रदायिक कह करके उनको अपमानित करने का काम हो रहा है।”

योगी बोले- ”कौन ऐसा भारतीय है जो अशफाक उल्ला खां, डॉ. अब्दुल कलाम, शहीद अब्दुल हमीद का सम्मान न करता हो, लेकिन जो लोग बाबर, गौरी जैसे लोगों के साथ रिश्ता जोड़ने की कोशिश करते हैं उनका स्थान कहां होना चाहिए। ये सोचने की जरूरत है। जो कौम अपने इतिहास की रक्षा नहीं कर सकती वो कौम भूगोल को नहीं सजों सकती। हमने महाराजा सुहेलदेव को भुला दिया। एक सरकार ने शरात की थी कि और बताया था कि सभी जनजातियां हिन्दू नहीं थीं। ऐसी शरारतें आजादी के बाद से ही की जा रही हैं।”