शनिवार को भारतीय थल और वायुसेना को ‘नए सेनापति’ मिल जाएंगे

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आम तौर पर सेना में ऐसी परंपरा रही है कि सेना प्रमुख बनाते वक्त सीनियरिटी ही पैमाना होता है, लेकिन थलसेना में ऐसा दूसरी बार हुआ कि जब सीनियरिटी को नजरअंदाज कर जूनियर को सेना प्रमुख बनाया जा रहा है| थल सेना प्रमुख बनने जा रहे लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत से सीनियर लफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हरिज हैं|

करीब 13 लाख की तादाद वाली थल सेना और करीब डेढ़ लाख कर्मियों की वायुसेना को शनिवार को ‘नए सेनापति’ मिल जाएंगे| थल सेना की कमान लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत को मिलेगी और वायुसेना की कमान एयर मार्शल बीएस धनोवा को|मौजूदा थल सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरुप राहा शुक्रवार को सेवानिवृत हो जाएंगे|

अब देखना होगा कि जब शनिवार को इन दोनों से जूनियर अधिकारी को सेना प्रमुख बनाया जाता है तो क्या ये अपने जूनियर रहे अधिकारी के मातहत काम करना पसंद करेंगे या फिर अपने पद से इस्तीफा देंगे| अगर ऐसा होता है तो सेना को एक साथ अपने दो काबिल वरिष्ठ अधिकारियों से हाथ धोना पड़ेगा| अब तक सेना में ऐसी परंपरा रही है कि अगर इतने ऊंचे पद पर किसी जूनियर को प्रमुख बनाया जाता है तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं| फिलहाल लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी पूर्वी कमान के प्रमुख हैं और लफ्टिनेंट जनरल हरिज दक्षिण कमान के प्रमुख हैं|

हालांकि सरकार का तर्क है कि नए सेना प्रमुख की नियुक्ति में मेरिट और काबिलियत को ध्यान में रखा गया है जो मौजूदा चुनौतियों का सामना करने में बेहतर तरीके से सक्षम हैं| अब दुनिया के ज्यादातर देशों की पेशेवर सेनाओं में वरिष्ठता के बजाए प्रोफेशनलिज्म को ध्यान रखा जाता है बात चाहे अमेरिका की हो या फिर चीन की|