मेरठ में प्राइमरी शिक्षक भर्ती का न्यूनतम रेट 15 लाख रुपये, इससे ऊपर की कक्षाओं का 25 लाख रुपये- ओम प्रकाश शर्मा

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विधान परिषद में शिक्षक दल के नेता ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि मेरठ में प्राइमरी के शिक्षक की भर्ती का न्यूनतम रेट 15 लाख रुपये है। इससे ऊपर की कक्षाओं के लिए रेट 25 लाख रुपये है। यह रकम शिक्षा अधिकारियों की जेब में जाती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह मझले बेटे को माता-पिता के अंतिम संस्कार का अधिकार नहीं होता, उसी तरह राज्यपाल के अभिभाषण में भी सिर्फ बेसिक और उच्च शिक्षा की बात की गई है, माध्यमिक शिक्षा को छोड़ दिया गया है। शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का उदाहरण देते हुए कहा कि नोएडा में रहने वाले एक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अपनी तैनाती के जिले में महीने में सिर्फ दो-तीन बार जाते हैं, वह भी शिक्षकों से उगाही करने के लिए। निश्शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की भेंट चढ़ रहा है। प्रदेश में कानून व्यवस्था का मखौल उड़ाया जा रहा है।

बसपा के सुनील चित्तौड़ ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सहारनपुर का माहौल दूषित करने के साथ सरकार महापुरुषों को बांट रही है। सबकी सुरक्षा करने वाले एसएसपी को जान बचाकर भागना पड़ा। आगरा की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह कैसा कानून का राज है जिसमें थाने में सीओ को मारा जाता है।

धन्यवाद प्रस्ताव में संशोधन पेश करते हुए राष्ट्रीय लोक दल के चौधरी मुश्ताक ने कहा कि गाय-भैंस खरीद कर लाने वालों को पुलिस परेशान करने लगी है या गोरक्षक। गाय तो ङ्क्षहदू और मुसलमान दोनों की माता है लेकिन, भाजपा सरकार ने ऐसा भेदभाव पैदा किया कि मुस्लिम अब गाय पालने से डर रहे हैं। मुजफ्फरनगर में सरियामार गिरोह के आतंक का हवाला देते हुए उन्होंने ध्वस्त कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा। कहा कि सरकार की कर्जमाफी स्कीम का फायदा डिफाल्टर उठाएंगे, किसान नहीं।

कांग्रेस के दिनेश प्रताप सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव पर संशोधन पेश करते हुए कहा कि रायबरेली में एम्स की स्थापना की योजना को रद करने का फैसला द्वेषपूर्ण है। यह फैसला इसलिए किया गया क्योंकि रायबरेली कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र है। गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताने के साथ उन्होंने कहा कि रायबरेली की 1344 बस्तियों में लोग फ्लोराइड और आर्सेनिक युक्त पानी पीने के लिए मजबूर हैं।

चौधरी मुश्ताक ने सहारनपुर कांड के संदर्भ में जब उसमें गमछाधारी लोगों के शामिल होने का जिक्र किया तो अधिष्ठाता डॉ.यज्ञदत्त शर्मा ने चुटकी लेते हुए कहा कि ‘आजकल गमछाधारी शब्द का प्रयोग बहुत हो रहा है। मैंं भी तो गमछाधारी हूं। कहीं आपका इशारा मेरी ओर तो नहीं? इस पर चौधरी मुश्ताक ने कहा कि मेरा यह आशय नहीं था, आप कहें तो मैं अपने शब्द वापस ले लूं।

source-DJ