मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पिछड़ा वर्ग विभाग वापस किया, भाजपा को पहले से दिया है अल्टीमेटम

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यूपी के कैनिबेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर काफी अर्से से अपनी सहयोगी पार्टी भाजपा से नाराज हैं। वह अब तकत लगातार ही सरकार और भाजपा की नीतियों के खिलाफ बयान देते रहे हैं लेकिन अब उन्होंने बहुत बड़ा फैसला कर लिया है। उन्होंने अपने मंत्रालय का प्रभार ही लौटा दिया है। इस फैसले के बाद यूपी की सियासत काफी गर्म हो गई है।


योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर कहा है कि वह पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का प्रभार छोड़ रहे हैं। उनके इस पत्र के बाद यह चर्चा होने लगी है कि जल्दी ही राजभर अपना कैबिनेट मंत्री का पद और बीजेपी का साथ भी छोड़ सकते हैं।
बताते चलें कि पिछड़ों को मिल रहे 27 फीसदी आरक्षण के बंटवारे और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर राजभर ने भाजपा को 100 दिन का अल्टीमेटम दिया हुआ है जो 24 फरवरी को पूरा हो रहा है। वह कहते रहे हैं कि इस अवधि तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो उनका और भाजपा का साथ नहीं रहेगा। अब 10 दिन पहले उन्होंने बड़ा कदम उठा कर संकेत दे दिया है कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।


ओम प्रकाश राजभर के पास पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की और लिखा कि विभाग आपको सौंप रहा हूं। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम अपने पत्र में लिखा है कि ‘अवगत कराना है कि सरकार गठन के फलस्वरूप मुझे दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का भी प्रभार सौंपा गया। सरकार द्वारा पिछडे़ वर्ग के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति अपेक्षित रूप से न किए जाने एवं पिछड़ी जातियों के 27 फीसदी आरक्षण के कोटे का बंटवारा सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के अनुरूप न किए जाने से पिछड़ी जाति के लोगों में गुस्सा है।
आगे यह भी अवगत कराना है कि पिछड़ा वर्ग आयोग की कमिटी में मेरे द्वारा सुझाए गए नामों में से एक भी नाम शामिल नहीं किया गया। मुझसे पिछडे वर्ग के लोगों को बहुत अपेक्षाएं हैं, लेकिन सरकार की पिछड़ा वर्ग के लोगों के हितों की लगातार अनदेखी के कारण मैं उन्हें उनका हक नहीं दिला पा रहा हूं। पिछड़े वर्ग के लोगों के साथ हो रहे भेदभाव और अनदेखी को लेकर पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का प्रभार आपको सौंप रहा हूं।’


हालांकि यहां पर यह साफ कर दें कि राजभर ने अभी सिर्फ पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय का प्रभार वापस किया है, मंत्री पद नहीं छोड़ा है, लेकिन उनका संदेश बेहद सख्त है। उनके अल्टीमेटम में अभी 10 दिन का समय बाकी है, लिहाजा इस सख्त कदम से उन्होंने संकेत देने की कोशिश की है कि भाजपा नेतृत्व के पास कुछ समय है लेकतिन अपना फैसला लेने में जल्दी करनी होगी।

राजभर दावा करते रहे हैं कि उनकी पार्टी के समर्थन की वजह से भाजपा 120 सीटों पर जीतने में कामयाब रही। देखना होगा कि भाजपा अब उनकी बातों को कितनी गंभीरता से लेती है।