जनता की नब्ज नहीं पढ़ पाए राजभर, लगा बड़ा झटका, बंगला भी गया

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सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने लोकसभा चुनाव में भाजपा से अलग होने का फैसला किया और अकेले चुनाव लड़े लेकिन उनका यह फैसला पूरी तरह से गलत साबित हुआ। राजभर ने चुनाव को लेकर जो भी दावे किए वह पूरी तरह से गलत साबित हुए।

ओम प्रकाश राजभर चुनाव प्रचार के दौरान कहते थे कि इस चुनाव में पूर्वांचल में भाजपा 30 सीटों में से सिर्फ 3 पर सिमट कर रह जाएगी लेकिन हुआ इसका उलटा। राजभर की पार्टी सुभासपा के उम्मीदवारों का तो यह हाल हुआ कि ज्यादातर जगह जमानत जब्द हो गई। उनकी स्थिति ऐसी भी नहीं रही कि किसी भाजपा उम्मीदवार की हार के लिए वह सीधे तौर पर वोट काटने वाले माने जा सकें।

इसीलिए मतदान खत्म होते ही जब एग्जिट पोल ने भाजपा को विराट जीत का संकेत दिया तो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले ओम प्रकाश राजभर को बर्खास्त किया। राजभर की पार्टी के उन सदस्यों को भी निगम और परिषदों में दिए गए पदों से हटा दिया गया। इसके बाद राज्य सरकार के संपत्ति विभाग ने नोटिस जारी करते हुए राजभर को मंत्री के रूप में आवंटित आवास को निरस्त कर दिया है। यानी उन्हें कालिदास मार्ग पर मिला बंगला खाली करना होगा। राजभर अब विधायक निवास-2 में रहेंगे। अब गाजीपुर की जहूराबाद सीट से विधायक राजभर के लिए दारूलशिफा में श्रेणी 4 का आवास आवंटित किया गया है। वह अपने विधायकी के कार्यकाल तक यहां रह सकेंगे।

बताते चलें कि मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व में ओम प्रकाश राजभर को दिए गए पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांग जन कल्याण विभाग अब पार्टी के नेता और सरकार में मंत्री अनिल राजभर को दे दिए हैं। इस तरह से एक तीर से दो निशाने साधे गए हैं, एक तो ओपी राजभर से छुटकारा पा लिया गया और अनिल राजभर को ज्यादा जिम्मेदारी देकर राजभर समाज की नाराजगी से भी बचा गया है।