बड़ा फैसला: अब देशी कंपनियां ही बनाएंगी पनडुब्बी, लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर

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घरेलू निजी क्षेत्र की भागीदारी से देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सरकार ने रक्षा खरीद नीति के महत्वपूर्ण ‘सामरिक भागीदारी मॉडल’ को आज मंजूरी दे दी।

पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस निर्णय पर मुहर लगायी गयी। इससे पहले रक्षा मंत्री अरूण जेटली की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में इसे मंजूरी दी गयी थी।

जेटली ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बताया कि रक्षा तैयारियों के तहत यह जरूरी हो जाता है कि रक्षा उपकरणों की घरेलू बाजार और उद्योग से खरीद की जाये। उन्होंने कहा कि सरकार की अपेक्षा है कि इस मॉडल के तहत रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मिलकर काम करेंगे।

इस मॉडल के लागू होने के बाद देश में ही पनडुब्बी, बख्तरबंद वाहन, लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर बनाने के लिए निजी कंपनियों को जिम्मेदारी दी जायेगी। ये कंपनी विदेशी प्रतिष्ठानों के साथ नियमों के अनुसार भागीदारी कर रक्षा उपकरणों को देश में ही बना सकेंगी। बाद में इस सूची में अन्य रक्षा उपकरणों को भी शामिल किया जायेगा।

इस नीति से सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा तथा साथ ही स्वदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों और छोटे उद्योगों की मदद से देश में रक्षा उपकरण उत्पादन का माहौल बनाने में मदद मिलेगी।

यह नीति तैयार करने के लिए सरकार ने सभी संबद्ध पक्षों से विस्तृत विचार विमर्श किया है जिससे वे रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में लंबे समय तक भागीदार रह सके। सरकार के इस कदम से भारतीय कंपनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने और रक्षा उत्पादन क्षेत्र का घरेलू बुनियादी ढांचा बनाने में मदद मिलेगी।

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