नि‍ठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा

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नि‍ठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाई है। यह 7वां मामला है, जि‍समें उसे फांसी की सजा सुनाई गई है। नि‍ठारी कांड में कुल 19 केस दर्ज हुए थे। इनमें से अबतक केवल 7 में सजा हुई है अन्‍य मामले पेंडिंग हैं|
14 साल की एक लड़की निठारी गांव में मौसा के पास रहती थी। वह अचानक 22 जून 2005 को गायब हो गई।घरवालों ने इसकी रि‍पोर्ट थाने में लि‍खवाई। बाद में निठारी कांड का खुलासा होने के बाद उसकी शिनाख्त उसकी खोपड़ी से हुई थी।इससे पहले भी सुरेंद्र कोहली पर एक सात वर्षीय बच्ची की हत्या व बलात्कार के मामले में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।सुरेंद्र कोहली पर 19 बच्चों की मर्डर और रेप का आरोप है। निठारी कांड के खुलासे के बाद सीबीआई ने सुरेंद्र कोहली पर 19 एफआईआर दर्ज की थी।इनमें से छह मामलों में मनिंदर सिंह पंधेर को रेप और मर्डर का आरोपी बनाया था। शेष मामलों में सुरेंद्र कोहली अकेला आरोपी है।पहले मामले में लोअर कोर्ट ने सुरेंद्र कोहली और मनिंदर सिंह पंधेर को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी,लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने पंधेर को बरी कर सुरेंद्र कोहली की सजा बरकरार रखी थी|
20 जून, 2005 को 8 साल की एक बच्ची ज्योति खेलने के लिए निठारी की पानी टंकी के पास गई। इसके बाद से वह घर नहीं लौटी। ज्योति के परिजन ने उसे काफी ढूंढा, लेकिन कोई खबर नहीं मिली।इसके कुछ दिनों बाद ही 6 साल का बच्चा हर्ष भी पानी की टंकी के पास से गायब हो गया। उसका भी कुछ पता नहीं चला।इस तरह लगातार बच्‍चों के गायब होने यह सिलसिला चलता रहा और करीब दर्जनभर बच्चे गायब हो गए।लोग अपने बच्चों को पानी टंकी के पास भेजने से डरने लगे। इस तरह से एक दर्जन से ज्यादा बच्चे गायब हो गए। पुलिस को मामले में कुछ गहरी साजिश नजर आई। इसके बाद अलग-अलग टीमों ने एनसीआर के अलावा मुंबई, आगरा और बिहार के कई जिलों समेत देश भर में जगह-जगह चक्कर लगाए।इसके बावजूद भी कोई खास सुराग नहीं मिला, जबकि सुराग निठारी में ही मौजूद था।
जब 7 मई 2006 को 21 साल की लड़की पायल का निठारी से गायब होना पुलिस के लिए चौंकाने वाला था। वहीं, पायल के पिता नंदलाल लगातार पुलिस पर खोजबीन का दबाव बना रहे थे।पुलिस को जानकारी मिली कि पायल के पास एक मोबाइल फोन था। जिसके स्विच ऑफ होने का पता लगा। पुलिस ने उस नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई।कॉल डिटेल में मुंबई से लेकर तमाम जगहों के नंबर पर थे। पुलिस ने उन नंबरों की जांच की, लेकिन हर जगह से खाली हाथ लौटी।एक खास नंबर पर कई इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल देखकर पुलिस ने उस पर बातचीत की। वह नंबर मोनिंदर सिंह का पंधेर का निकला।पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने यह बताकर पल्ला झाड़ लिया कि नौकरी के लिए वह आती रहती थी। चूंकि पंधेर की गिनती बड़े रईसजादों में होती थी। इसलिए पुलिस उससे कड़ाई से पूछताछ नहीं कर पाती थी।पायल का जब कहीं सुराग नहीं मिला तब जांच टीम ने पंधेर का नार्को टेस्ट करने के लिए पुलिस ने इजाजत मांगी। तब के सीओ दिनेश यादव ने इसकी इजाजत दे दी।3 दिसंबर 2006 को पंधेर को सेक्टर-6 स्थित सीओ ऑफिस बुलाया गया। यहां पायल के पिता नंदलाल को भी बुलाया गया था पंधेर से एक कमरे में सख्ती से पूछताछ की गई। आखिरकार उसने यह बात मान ली कि पायल उसकी कोठी पर आती थी। पंधेर ने यह भी खुलासा किया कि पायल एक कॉलगर्ल थी। इसके बाद पूरी घटना साफ हो गई।गायब होने के बाद ज्योति, पुष्पा विश्वास, नंदा देवी, पायल, रचना, हर्ष, कु. निशा, रिम्पा हलधर, सतेंद्र, दीपाली, आरती, पायल, पिंकी सरकार, अंजली, सोनी, शेख रजा खान, बीना आदि‍ का कत्‍ल कर दि‍या गया|
जानकारी के मुताबिक, निठारी निवासी नंदा देवी (25) अपने घर से 31 अक्टूबर 2006 को काम के सिलसिले में सुरेंद्र कोली से मिलने के लिए निकली थी, इसके बाद वह गायब हो गई थी। वह पति को बताकर गई थी कि कोली ने उसे झाड़ू- पोंछा का काम दिलाने के लिए बुलाया है। नंदा के गायब होने के बाद उसके पति ने तलाश शुरू की, सुराग न मिलने पर उसने पुलिस से शिकायत की थी।29 दिसंबर 2006 को निठारी कांड का खुलासा करते हुए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को गिरफ्तार किया गया था|