निर्भया के गुनाहगारो की फांसी पक्की, कोर्ट ने कहा रहम की गुंजाइश नहीं, घटना समाज को झकझोर देने वाली

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दिल्ली में दिसंबर 2012 में निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चारों आरोपियो को मिली फांसी की सजा को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा सेक्स और हिंसा की भूख के चलते बड़ी वारदात को अंजाम दिया, दोषी अपराध के प्रति आसक्त थे, जैसे अपराध हुआ, ऐसा लगता है अलग दुनिया की कहानी है,  घटना की रात नाबालिग समेत सभी दोषी बस में मौजूद थे, पुलिस की जांच और डीएनए से गुनाह साबित हुआ, जजों के फैसला सुनाने के बाद कोर्ट में तालियां बजीं|

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद निर्भया की मां ने कहा हम इस फैसले से संतुष्ट हैं। सबका धन्यवाद समाज, देशवासियों और मीडियावालों का शुक्रिया। हम आज कह सकते हैं कि कहीं न कहीं देर है लेकिन अंधेर नहीं। नाबालिग दोषी के छूटने का मलाल रहेगा, पिछले साढ़े चार साल में कई बार खुद को टूटा हुआ महसूस किया, मुझे कई दफा तो ऐसा लगा कि शायद न्याय ही नहीं मिलेगा। मुझे आज के दिन का लंबे समय से इंतजार था और इतने दिनों तक हमारा साथ देने क‌े लिए देशवासियों का धन्यवाद।

उन्होंने कहा कि पहले मेरी बेटी को कोई जानता था फिर भी लोगों ने उसका साथ दिया लेकिन आज भी हालत वैसी ही है। निर्भया की मां ने सरकारों के रवैये पर निराशा जताते हुए कहा कि ऐसे हादसों से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। रेप दो वर्णों का एक छोटा सा शब्द है लेकिन सिस्टम को इस बारे में सोचना चाहिए और कड़ा एक्शन लेना चाहिए। मेरी बेटी बेकसूर थी फ‌िर भी उसे न्याय म‌िलने में इतनी देरी क्यों हो रही है? टीवी पर बयान देने और डिबेट करने से इसका हल नहीं निकलेगा, जब तक कड़ा कानून नहीं बनेगा तब तक इस पर हमें न्याय नहीं मिलेगा।सरकार का इस मुद्दे पर संवेदनशील होना काफी जरूरी है।

कोर्ट ने कहा जिस बर्बरतापूर्ण तरीके से घटना को अंजाम दिया गया, उस लिहाज से हाईकोर्ट का फैसला सही था। रहम की गुंजाइश नहीं है। घटना समाज को हिला देने वाली थी। घटना को देखकर लगता है कि ये धरती की नहीं बल्कि किसी और ग्रह की है। घटना के बाद शॉक की सुनामी आ गई। दोषियों ने पीड़िता को बस से कुचलकर मारने की कोशिश भी की। बाद में सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई। लोगों को तभी भरोसा आएगा जब इसी तरह से फैसला हो। घटना समाज को झकझोर देने वाली है।