यूपी को आज मिलेगा नया मुख्यमंत्री , ये नाम है दौर में

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उत्तर प्रदेश में भाजपा ने शानदार जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है। 2012 में 47 सीटें जीतने वाली बीजेपी को 2017 में 325 सीटें मिली हैं। पिछले पांच साल के दौरान राज्य में बीजेपी 6 गुना बढ़ गई है। 66 सालों के दौरान ये किसी भी पार्टी की तीसरी सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले 1951 में कांग्रेस ने 430 में से 388 सीटें जीती थीं। इस बार सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 55 सीटाें पर जीत हासिल की वहीं बसपा काे माेदी की सुनामी के चलते महज 19 सीटाें पर संतुष्ठ हाेना पड़ा। 5 निर्दलीय प्रत्याशियाें ने भी जीत हासिल की।

यूपी विधानसभा चुनाव में परचम लहराने के बाद अब बीजेपी में सीएम पद के चेहरे काे लेकर चर्चाएं शुरू हाे गई हैं। रविवार की शाम पार्लियामेंट बाेर्ड की बैठक में सीएम पद का चेहरा भी तय कर दिया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने शनिवार काे जीत मिलने के बाद ही घाेषणा कर दी। अाइए देखते हैं सीएम पद के लिए काैन सा चेहरा सबसे अागे चल रहा है…

1-राजनाथ सिंह
गृह मंत्री राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश में बीजेपी के आखिरी मुख्यमंत्री थे। साल 2002 में सत्ता गंवाने के बाद फिर पार्टी ने राज्य में कभी जीत का मुंह नहीं देखा था। फिलहाल गाजियाबाद से सांसद राजनाथ सिंह ने यूपी विधानसभा चुनाव में 120 रैलियों को संबोधित किया था। वो फिलहाल बीजेपी के सबसे सीनियर नेताओं में गिने जाते हैं और दो बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। कई अहम ओहदों को संभालने का अनुभव और अगड़ी जातियों का समर्थन उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है। हालांकि ये देखना बाकी है कि क्या राजनाथ सिंह केंद्र से राज्य की सियासत में लौटना चाहेंगे?

2- केशव प्रसाद मौर्य
केशव प्रसाद मौर्य फिलहाल पार्टी की यूपी इकाई के अध्यक्ष होने के साथ फूलपुर से सांसद भी हैं। 47 साल के मौर्य प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तरह खुलकर सामने अाए अाैर कहीं न कहीं यूपी में इस भारी जीत में उनका अहम याेगदान है। कल्याण सिंह के हाशिये में चले जाने के बाद वो गैर-यादव ओबीसी तबके से बीजेपी का चेहरा हैं।

3- आदित्यनाथ
बीजेपी का कट्टरवादी हिंदू चेहरा माने जाने वाले योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर इलाके में अच्छी पकड़ है। हालांकि उन्होंने खुद कभी सीएम बनने की मंशा जाहिर नहीं की है लेकिन उनके समर्थक खुलकर ये मांग उठाते रहे हैं। उनपर आरएसएस का हाथ भले हो लेकिन बतौर सीएम चुनना 2019 के आम चुनाव में अल्पसंख्यकों से पार्टी को दूर कर सकता है।

4- मनोज सिन्हा
गाजीपुर सांसद मनोज सिन्हा केंद्र में दूरसंचार और रेलवे मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। आईआईटी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके सिन्हा मिडल क्लास को पसंद आ सकते हैं। साफ-सुथरी छवि और पूर्वी यूपी में अच्छा-खासा जनाधार भी उनके पक्ष मे जाते हैं। इसके अलावा सिन्हा को संगठन का कुशल नेता भी माना जाता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या बीजेपी एक ब्राह्मण नेता को मुख्यमंत्री बनाने का जोखिम उठाएगी?