कभी आमने-सामने थी मीरा कुमार और मायावती, अब साथ साथ

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करीब 32 साल पहले वह दोनों चुनावी मैदान में आमने-सामने थीं। इतने वक्त में सियासत ने काफी करवट ली। अब राष्ट्रपति पद का चुनाव आया है। अब दोनों साथ-साथ हैं। जी हां, यह है मीरा कुमार और मायावती के सियासी अतीत की हकीकत..। दोनों दलित वर्ग से आती हैं और मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष रह चुकी हैं तो मायावती चार बार यूपी जैसे राज्य की मुख्यमंत्री।

अब मीरा कुमार विपक्षी दलों की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं। वह एनडीए के रामनाथ कोविंद के मुकाबले में हैं। वह 1985 का साल था। बिजनौर में लोकसभा उपचुनाव होना था। बिहार की मीरा कुमार कांग्रेस के टिकट पर यूपी की बिजनौर सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ने आईं। यहीं से पहली बार बसपा की मायावती भी मैदान में उतरीं। इसी सीट से एलकेडी की ओर से राम विलास पासवान (मौजूदा केंद्रीय मंत्री) भी चुनाव लड़ने आए। मीरा कुमार व पासवान दोनों मूलत: बिहार से ही हैं। उस वक्त कांग्रेस के पक्ष में माहौल था।

कांग्रेस की वह सीट थी। जबरदस्त मुकाबले में मीरा कुमार ने मायावती व राम विलास पासवान दोनों को शिकस्त दे दी। और सांसद बन गईं। बाद में मायावती यहां से 1989 का लोकसभा चुनाव जीतीं। अब संयोग देखिए मायावती मीरा कुमार के साथ खड़ी हैं। एनडीए के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद जहां कानपुर देहात के रहने वाले हैं तो बिजनौर से सांसद रहने के कारण मीरा कुमार का यूपी से पुराना कनेक्शन रहा है। दोनों दलित वर्ग से हैं।

कांग्रेस ने मीरा कुमार को प्रत्याशी बना कर एक तरह से बसपा को भी उस ऊहापोह से निकाला लिया है जो दलित वर्ग के रामनाथ को¨वद के सामने आने से पैदा हुई थी। बसपा ने रामनाथ को¨वद के मुकाबले मीरा कुमार को बेहतर प्रत्याशी माना है। यही कारण है कि अब बसपा मीरा कुमार के साथ है और इस बहाने वह भाजपा के दलितों को लुभाने की मुहिम को रोकने का काम करेगी।

source-HT