नये नोट देने की अधूरी तैयारी, कश्मीर से कन्याकुमारी तक अफरा तफरी

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काले धन पर लगाम लगाने के लिए बड़े नोटों पर लगाई गई पाबंदी फिलहाल देश की जनता को भारी पड़ रही है। दूसरे दिन भी जहां पूरे देश में नये नोट ही नहीं पुराने सौ के नोट के लिए अफरातफरी दिखी। लेकिन बैंक पूरी तरह तैयार नहीं थे।

नये नोट बैंकों व एटीएम तक पहुंचाने की रिजर्व बैंक की सारी तैयारियां अधूरी साबित हुई। खास तौर पर एटीएम के जरिए नगदी वितरित करने का सारा प्रबंध असफल हो गया है। नये नोट फिलहाल एटीएम के अनुकूल नहीं हैं। नये नोटों की संख्या भी अभी पर्याप्त नहीं है। जबकि छोटे नोटों की संख्या इतनी नहीं कि आम लोगों की जरूरतें पूरी कर सके। ऐसे में कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला तेज कर संकेत दे दिया है कि वह इसे सरकार के लिए राजनीतिक संकट बनाने में जुट गई है।

मंगलवार (08 नवंबर, 2016) को 500 व 1000 रुपये के नोटों को प्रचलन से बाहर करने के फैसले के बाद शुक्रवार को पहली बार एटीएम खोले जाने थे। बैंक शाखाओं को गुरुवार को ही खोला गया था। उम्मीद थी कि एटीएम खुलने से बैंकों में भीड़ कम होगी और लोगों को नये नोट मिलने लगेंगे। लेकिन उल्टा हुआ एटीएम में कौन कहे बैंक शाखाओं तक भी नये नोट पहुंचाने में केंद्रीय बैंक की व्यवस्था औंधे मुंह गिर गई। दोपहर तक देश के सिर्फ 10 फीसद एटीएम तक ही नकदी पहुंच पाई और वह भी पुराने 100 के नोट। नोटों की कमी की वजह से कई बैंक देर शाम तक ही अपनी शाखा खोल सके। इसमें यस बैंक सहित कुछ अन्य बैंक के ब्रांच शामिल थे।

नकदी की किल्लत

बैंकों के सामने सबसे ज्यादा नकदी की किल्लत है। हालात यह है सिर्फ 2000 के नये नोट पहुंचे हैं। उनकी संख्या भी काफी कम है। जबकि 500 रुपये के नोट के दर्शन अभी बैंकों को भी नहीं हुए हैं।

आरबीआइ के अधिकारियों का कहना है कि नोट नहीं पहुंचाने के पीछे एक बड़ी दिक्कत वाहनों व सुरक्षा गार्डो की कमी है। नकदी भेजने वाली कंपनियों के पास गाड़ी का भी अभाव है और सुरक्षा एजेंसियों का भी। सुरक्षा वजहों से आनन फानन में नई एजेंसियां या बिना उचित मानकों के वाहनों का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता। मौजूदा वाहनों व सुरक्षा बलों की मदद से अभी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बैंकों तक भी नकदी नहीं पहुंच पाई है।

एटीएम भी तैयार नहीं

अगर रिजर्व बैंक पर्याप्त नकदी नहीं पहुंचा पाया है तो बैंकों के एटीएम भी नये नोटों को नहीं दे पा रहे हैं। एटीएम के सूचना प्रौद्योगिकी में बदलाव की प्रक्रिया जारी है जिसमें अभी कई दिन लग सकते हैं। नये नोटों का साइज व वजन अलग है जिसकी वजह से मौजूदा एटीएम उसे ‘रीड’ नहीं कर पा रहे। एक बैंक अधिकारी ने बताया कि, अभी सिर्फ 100 के नोट ही एटीएम में डाले जा रहे हैं जबकि पहले से ही बाजार में 100 के नोटों की संख्या काफी कम है। यही नहीं पहले जहां एक एटीएम मशीन में जहां 500 व 1000 के 50 लाख रुपये तक डाले जा सकते थे। अब 100 के नोट सिर्फ 10 लाख रुपये तक ही डाल पा रहे हैं। इससे हम पहले के मुकाबले पांच गुणा कम राशि ग्राहकों को दे रहे हैं।

नियमों में अस्पष्टता

पुराने नोट हटा कर नये नोट देने के सरकार के नियमों की अस्पष्टता भी ग्राहकों को महंगी पड़ रही है। आरबीआइ ने बैंकों को जो नोटिस भेजा है उसमें यह साफ नहीं है कि एक आदमी रोजाना 4000 रुपये बैंक शाखा से ले सकता या एक दिन में कई शाखाओं से चार-चार हजार रुपये ले सकता है। दैनिक जागरण के कुछ बैंक मैनेजरों से संपर्क किया। हर किसी की जवाब अलग था। एक मैनेजर का जवाब था- हम ग्राहक का पैन कार्ड या आइडी नंबर डालते हैं और कंप्यूटर अगर उसे ओके बताता है तो हम नोट बदल देते हैं|