31 नामों के चलते अखिलेश ने की मुलायम से बगावत

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अखिलेश शुरू से कहते रहे कि वे बाहुबलियों-माफियाओं को टिकट नहीं देंगे, लेकिन अपनी लिस्ट में उन्होंने इसका ख्याल नहीं रखा। उनकी लिस्‍ट में कई ऐसे नाम हैं, जिनका अच्‍छा-खासा क्रिमिनल रिकॉर्ड है।समाजवादी पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव, मुलायम सिंह और शिवपाल यादव में फूट पड़ गई है। मुलायम सिंह ने 393 कैंडिडेट्स के नाम तय किए। इसके बाद अखिलेश ने 235 कैंडिडेट्स की अपनी अलग लिस्ट जारी कर दी। बेटे ने 171 तो पिता ने 176 सिटिंग एमएलए को टिकट दिया। दोनों की लिस्ट में 145 नाम कॉमन हैं।वहीं, मुलायम की बहू और प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा और विवादास्पद मंत्री गायत्री प्रजापति को लिस्ट में नहीं रखा|
अखिलेश की लिस्‍ट में मुलायम की बहू अपर्णा यादव का नाम नहीं है।
मुलायम परिवार के गढ़ इटावा से कैंडिडेट को अखिलेश ने वेटिंग में डाला है।
बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा का भी अखिलेश की लिस्‍ट से नाम कट गया है।
सपा ने हाल ही में गायत्री प्रजापति को पार्टी का नेशनल सेक्रेटरी बनाया, लेकिन अखिलेश ने उनका नाम काट दिया।
फैजाबाद की बीकापुर सीट से आनंदसेन, गोंडा से विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह, फैजाबाद की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह, बस्‍ती की हरैया सीट से राजकिशोर सिंह को टिकट दिया। चारों नेताओं की गिनती दागियों में होती है।
इनके अलावा शाहजहांपुर की ददरौल सीट से राममूर्ति वर्मा (जर्नलिस्‍ट की हत्‍या का आरोप), सीतापुर की सेवता सीट से महेंद्र कुमार सिंह (गोवा के डांस बार में रेड के दौरान पक‍ड़े गए), लखनऊ मध्‍य सीट से रविदास मेहरोत्रा (15 से ज्‍यादा केस दर्ज), कानपुर नगर की सीसामऊ सीट से हाजी इरफान सोलंकी (डॉक्‍टरों को दौड़ाकर पीटने का आरोप), बिजनौर की नगीना सीट से मनोज पारस (रेप का आरोप) भी अखिलेश की लिस्ट में हैं।
अखिलेश ने मुलायम के गढ़ आजमगढ़ में किसी का टिकट नहीं बदला है।
मुलायम ने लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव के भाई अनुराग का टिकट काटकर दागी मंत्री शारदा प्रताप शुक्‍ला को कैंडिडेट बनाया है। मुलायम ने विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह को तरबगंज से टिकट दिया है।
करीबी पवन पांडेय, अरविंद सिंह गोप, राम गोविंद चौधरी, अभिषेक मिश्रा इन हुए।
मुलायम की लिस्‍ट में शामिल अमनमणि त्रिपाठी और अतीक अहमद आउट हुए।
मुलायम-शिवपाल और अखिलेश की ओर से जारी लिस्‍ट में 145 नाम ऐसे हैं जो कॉमन हैं।
मुलायम की लिस्‍ट में 176 सिटिंग एमएलए में से 77 क्रिमिनल हैं (43%)।
अखिलेश की लिस्‍ट में 171 सिटिंग एमएलए में से 38 क्रिमिनल हैं (22%)।
मुलायम और अखिलेश की लिस्ट में 76 नाम अलग हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में सभी सीटों पर जातियां एक जैसी ही हैं।ऐसे में मुलायम सिंह थोड़े नरम पड़ सकते हैं। संभव है कुछ दिन बाद दोनों लिस्ट मिलाकर कॉमन लिस्ट जारी कर दी जाए। टकराव ज्यादा बढ़ा तो शिवपाल यादव प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी से सस्पेंड भी कर सकते हैं।अगर ऐसा हुआ तो सपा दो हिस्सों में बंट सकती है। अखिलेश नई पार्टी की घोषणा कर सकते हैं।अखिलेश की लिस्ट को नॉमिनेशन के वक्त शिवपाल चुनौती दे सकते हैं। लिस्ट पार्टी अध्यक्ष की ही मान्य होती है। क्योंकि नामांकन के समय फॉर्म बी देने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष का होता है।मुलायम राजी हुए तो तो अखिलेश की लिस्ट रद्द हो सकती है। ऐसे में अखिलेश अपने लोगों को बतौर निर्दलीय मैदान में बने रहने को कह सकते हैं|
सपा ने अब तक 3 बार में (सबसे पहले 176, फिर 149 और अब 68 कैंडिडेट) के नामों की घोषणा की। कुल 393 कैंडिडेट्स में 206 सिटिंग एमएलए और 187 नए चेहरे हैं। दूसरी तरफ गुरुवार देर शाम अखिलेश की ओर से जारी की गई 235 की लिस्‍ट में 171 सिटिंग एमएलए और 64 वो नए चेहरे हैं, जहां पिछली बार सपा नहीं जीती थी।माना जा रहा है कि ये नेता सपा से अलग चुनाव लड़ेंगे। बची हुई सीटों के लिए भी सीएम जल्द अपने उम्मीदवारों का एलान करेंगे।अखिलेश ने मुलायम के 176 सिटिंग एमएलए की लिस्‍ट से 31 नाम काट दिए हैं|