मेरठ की डीएम बी. चंद्रकला ने लैंड डील पर लिया जबरदस्त फैसला, ३३ साल से था पेंडिंग

109
SHARE

1983 से अब तक 33 साल गुजर चुके हैं। इस बीच मेरठ से 33 ही डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेेट जा चुके हैं। लेकिन एक मामले में किसी ने भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। जब से मेरठ की डीएम बी चंद्रकला बनी है तब से मेरठ में वो सब हो रहा है जो कभी नहीं हुआ है। सदर तहसील के गांव घोसीपुर में स्थित जमीन को लेकर 33 वर्ष पहले शुरु हुए विवाद ने नया मोड़ ले लिया। जिलाधिकारी बी चंद्रकला के आदेश पर देहलीगेट थाने में जिले में तैनात अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उपनिदेशक, पूर्व एसडीएम और तहसीलदार सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।

 

देहलीगेट थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार गांव घोसीपुर स्थित जमीन को वर्ष 1983 में तत्कालीन एसडीएम ने पीर मेला में दर्ज किया था। बाद में भूमि का मामला कोर्ट में गया। कुछ ग्रामीणों ने भूमि को वक्फ पीर मेला हजरत शहाबुद्दीन खेडे वाला बताकर विरोध किया। जिसके बाद डीएम ने मामले को लेकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से आख्या मांगी। उधर, मामले की जांच के आदेश सदर तहसील अधिकारियों को भी दिए गए। तहसील प्रशासन द्वारा जांच के बाद उक्त भूमि को ग्राम सभा की जमीन बताया गया और साजिश रचकर भूमि को वक्फ पीर मेला के नाम करना बताया। उधर, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा डीएम को मामले में उपलब्ध कराए गए अभिलेखों में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के आदेश का हवाला दिया गया। जिसमें बोर्ड ने उक्त भूमि को पीर मेला की माना है।

डीएम बी. चंद्रकला के आदेश पर शनिवार को छह अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज हुआ। सदर तहसील प्रशासन ने वर्ष 1983 से पहले भूमि को ग्राम सभा की बताया है। जबकि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अभिलेख और वक्फ बोर्ड के पत्र सामने रखते हुए भूमि को पीर मेला की बताकर अपना दावा मजबूत किया है। इस मामले में उपनिदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एसएन पांडे ने कहा कि वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक भूमि पीर मेला के नाम पर है। जिसके सभी साक्ष्य मौजूद हैं। मामला दर्ज होने की जानकारी मिल गई है। मजबूती से अपना पक्ष रखा जाएगा।

 

एसएन पांडेय उपनिदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मेरठ, चंद्र प्रकाश सिंह पूर्व एसडीएम, ओपी दूबे और रमेश चंद्र यादव पूर्व तहसीलदार, नेतराम और रामनाथ जाटव पूर्व रजिस्ट्रार कानूनगो।

लगाई धारा और सजा

– मामले में 120 बी की धारा साजिश रचने, दो साल की सजा।

– धारा 219,218,217 में तथ्य छिपाकर फर्जी कागजात तैयार करना, सजा पांच साल जुर्माना सहित।

– धारा 420 में धोखाधड़ी करना, सजा सात साल।

– धारा 464 और 467 में फर्जी कागजात के आधार पर फर्जीवाड़ा करना, धोखा देना। जुर्माना और आजीवन कारावास तक की सजा।

– धारा 167 में सजा और जुर्माने का प्रावधान है।