ड्राइवर के कहने पर फैसले लेती हैं मायावती, 14 साल साथ काम करने वाले OSD गंगाराम अंबेडकर ने कहा

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गंगाराम ने बुधवार को मायावती के ओएसडी पद से इस्तीफा दे दिया। एक इंटरव्यू में मायावती के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) गंगाराम अंबेडकर ने कहा कि- ‘बहनजी ड्राइवर के कहने पर पूरी पार्टी चला रही हैं। उनको रास्ते पर लाने के लिए इस्तीफा दिया है। शायद बसपा परिवार के छोटे सदस्य की बातें समझ में आएंगी तो पार्टी बच जाएगी।

बहनजी ने एक ड्राइवर के भरोसे पूरी पार्टी सौंप दी है: गंगाराम
– पिछले 14 सालों से मायावती के ओएसडी के रूप में काम करने वाले गंगाराम अंबेडकर ने आगे कहा- ‘बहनजी और बसपा को कोई और चला रहा है। हमारा इस्तीफा बहन जी को अलर्ट करने के लिए है।’
– गंगाराम ने सतीश चन्द्र मिश्रा को मायावती का ड्राइवर बताते हुए कहा- ‘बहनजी ने एक ड्राइवर के भरोसे पूरी पार्टी सौंप दी है, जबकि उस ड्राइवर को हमारे और बहनजी के मिशन से कोई मतलब नहीं है।’
– ‘कभी-कभी ड्राइवर की बात माननी पड़ती है, लेकिन बहनजी अब उस ड्राइवर के ही कहने पर चलने लगी हैं। ड्राइवर शॉर्ट कट रास्ता दिखाता तो बहनजी उधर ही चल देती हैं।’
– ‘ऐसे रास्ते और ऐसे लोगों से बच निकलने की जरूरत है।’
– ‘बहनजी को ये भी सोचना चाहिए कि रास्ता कौन सा है और कौन रास्ता दिखा रहा है। कभी-कभी रास्ता दिखाने वालों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।’
बहनजी से मिलने से रोकते हैं 2 लोग: गंगाराम
– गंगाराम अंबेडकर ने आगे कहा- ‘हमारा इस्तीफा किसी खास मकसद या लालच से नहीं हैं। वरना विधानसभा चुनावों के पहले करते।’
– ‘इस वक्त करने का मकसद बहनजी को ये बताना है कि, अब भी वक्त है हम 2019 जीत सकते हैं।’
– ‘मैं बसपा परिवार का अपने को छोटा बच्चा मानता हूं हो सकता है, मेरे इस्तीफे से बहन जी की आंखे खुल जाएं।’
– ‘बड़े जिम्मेदारों से सवाल पूछना चाहिए कि कमी कहां रही और क्या समस्या हुई कि लोग छोड़कर जा रहे हैं।’
– ‘बहनजी के यहां 2 लोग हैं जो हम जैसे छोटे कार्यकर्ताओं को उनसे मिलने ही नहीं देते हैं।’
– ‘उन्हीं के लोगों ने पूरे बंगले में बहनजी के आस-पास पूरी तरह से घेरा बना लिया है।’

– ये दो-तीन लोग पूरी तरह से मायावती को भ्रमित कर रहे हैं। वो किसी दलित-पिछड़े व्यक्ति को राजनीति में नहीं लाना चाहते हैं।
बसपा में हो गई बगुलों की मौज
– गंगाराम अंबेडकर ने आगे कहा- ‘बहनजी के यहां छोटे लोगों को टारगेट किया जा रहा है।’
– ‘हमें बहनजी से मिलने के लिए हफ्तों का समय लगता है, उसपर भी मिल नहीं पाते।’
– ‘हो सकता है घर के छोटे बर्तन की आवाज से बहन जी हमारी तरफ भी ध्यान देंगी। शायद इससे उन्हें याद आएगा कि हमारा मिशन क्या था और किसके कहने पर चल रहे हैं।’
– ‘पेड़ पर जब ज्यादा बगुले बैठने लगते हैं, तो बाग का माली पूड़ों की छंटाई करता है, या फिर बगुलों का हटाता है।’
– ‘अब बहनजी को तय करना है कि बाग की छंटाई करनी है या बगुलों को हटाना है। क्योंकि ये बगुले बस मलाई चाटते हैं, जमीन पर काम हम करते हैं। फिलहाल बसपा में बगुलों की मौज है।’