कांग्रेस को मायावती का समर्थन मजबूरी नहीं 2019 के लिए मास्टर प्लान है

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस तीन राज्यों में सरकार बनाने जा रही है। बीएसपी चीफ मायावती ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस को समर्थन का ऐलान कर दिया है और कहा कि जरूरत पड़ी तो राजस्थान में भी समर्थन करेंगे। मायावती की तरह ही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कांग्रेस को समर्थन का ऐलान कर दिया, यहां पर बड़ी बात यह है कि इन चुनावों में तीनों ही पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था।

बहरहाल यहां पर बड़ी बात मायावती का कांग्रेस को समर्थन के लिए ऐलान करना है। अखिलेश यादव भी भले ही चुनावों के दौरान कांग्रेस पर सख्त हुए थे, लेकिन राहुल गांधी से उनके अच्छे संबंधों की वजह से माना जा रहा था कि ये तल्खी चुनाव की वजह से है।

यहां पर एक बात पर हमें गौर करना होगा कि मायावती ने कांग्रेस को समर्थन का ऐलान कर दिया जरूर लेकिन उनकी भाषा बेहद सख्त रही है। उन्होंने कहा है कि चूंकि बीजेपी को रोकना ही हमारी प्राथमकिता है इसलिए उसे सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस से विचारों में सहमति न होने के बावजूद हमने कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया है।

इतना ही नहीं, मायावती ने यह भी कहा कि बीजेपी की गलत नीतियों और गलत प्रणाली से जनता त्रस्त हो गई थी इसलिए दिल में पत्थर रखकर तीनों राज्यों की जनता ने न चाहते हुए भी वहां पूर्व में रही कांग्रेस को अपना विकल्प समझकर वोट दे दिया।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस 2019 लोकसभा चुनाव में भी इसे भुनाने की कोशिश करेगी।

मायावती के समर्थन और इतनी तल्ख भाषा से साफ है कि कांग्रेस के साथ वह 2019 में गठबंधन के लिए तैयार हैं लेकिन शर्तें मायावती की होंगी। जैसे नतीजे आए हैं उनमें वोट शेयर पर नजर डालते हुए गौर कीजिए। छत्तीसगढ़ में बीएसपी को 2 सीटें मिली हैं और वोट शेयर है 3.9 फीसदी का। मध्य प्रदेश में भी बीएसपी को 2 सीटें मिली हैं और वेट शेयर है 5 फीसदी का। राजस्थान में बीएसपी को 6 सीटें मिली हैं और वोट शेयर है 4 फीसदी का।

अब बीजेपी और कांग्रेस के वोट शेयर को देखिए। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 43 फीसदी और बीजेपी 33 फीसदी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस 40.9 और बीजेपी 41 फीसदी। राजस्थान में कांग्रेस 39.3 फीसदी और बीजेपी 38.8। साफ है कि छत्तीसगढ़ को छोड़ कर मध्य प्रदेश और राजस्थान में अगर कांग्रेस ने बीएसपी के साथ गठबंधन किया होता तो आंकड़े कुछ और ही होते।

यह स्थिति 2019 में भी बनी रह सकती है। 2019 का चुनाव बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा अहम है। पार्टी उन गलतियों को दूर करके ही लड़ेगी जो इस बार हो गईं। ऐसे में कांग्रेस अगर बीजेपी को रोकने के लिए गंभीर होगी तो वह 2019 में बीएसपी की अनदेखी नहीं कर सकती। कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश में तो बीएसपी को महत्व देने की मजबूरी है ही अभी से उसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी महत्व देना होगा। 2019 में ज्यादा महत्व देना होगा।

यह कांग्रेस की मजबूरी है, देखना है कि वह इसे समझ पाती है या नहीं। अगर समझी तो यह अभी से इन तीन राज्यों में बीएसपी को सरकार में मिले महत्व से समझ आ जाएगा। मायावती ने कांग्रेस को यही याद दिलाने के लिए तल्ख शब्दों का इस्तेमाल भी किया है।