मथुरा के सात धर्मस्थल जल्द ‘तीर्थस्थल’ घोषित होंगे: योगी आदित्यनाथ

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वृन्दावन के संत समाज को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार जल्द ही मथुरा के वृन्दावन, गोवर्धन आदि सात धर्मस्थलों को ‘तीर्थस्थल’ घोषित करेगी तथा एनजीटी के आदेश पर चल रहे ध्वस्तीकरण कार्य से आश्रमों एवं आम जनता को नुकसान से बचाने के लिए कोई न कोई रास्ता अवश्य निकालेगी. योगी ने वृन्दावन में स्वामी ज्ञानानन्द के कृष्ण कृपा धाम आश्रम में शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम एवं आरएसएस के प्रांत प्रचारक रहे भागवत वक्ता विजय कौशल के दिव्य प्रेम सेवा संस्थान में मानसी ध्यान केंद्र के उद्घाटन अवसर पर संत समाज एवं आम जनता को संबोधित करते हुए सरकार द्वारा निकट भविष्य में ही इस संबंध में निर्णय लिए जाने की बात कही.

उन्होंने वृन्दावन के परिप्रेक्ष्य में कहा, ‘इस पवित्र तीर्थस्थली के कण-कण में भगवान कृष्ण की लीलाएं समाई हुई हैं जिनसे लगता है कि वे स्वयं यहां विराजमान हैं. पूरी दुनिया के श्रद्धालु यहां आते हैं. सरकार वृन्दावन व गोवर्धन को तीर्थस्थल घोषित करने के लिए प्रतिबद्ध है. इसलिए ब्रज विकास परिषद का गठन किया गया है.’ उन्होंने कहा, ‘हम इस क्षेत्र को धार्मिक, आध्यात्मिक रूप में विकसित करना चाहते हैं.

परिषद की स्थापना के साथ इसकी शुरुआत भी कर दी है.’ उन्होंने कहा, ‘जब तक भारत में अध्यात्म के केंद्र (धर्मस्थल) स्थापित हैं, तब तक भारत की अस्मिता पर कोई खतरा नहीं है.’ उन्होंने इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पिछले 92 वर्षों में दिए गए योगदान का जिक्र करते हुए कहा, ‘जब तक दुनिया के सबसे बड़े संगठन का सानिध्य प्राप्त है, हमारी यह परम्परा विकसित होती रहेगी और उसके मार्गदर्शन में आगे बढ़ने पर कोई भी भारत का बालबांका नहीं कर पाएगा.’ उन्होंने यमुना के थाले (रिवरबेड क्षेत्र) में बने आश्रम के सुरम्य वातावरण का जिक्र करते हुए कहा, ‘यदि भारत का हर धर्मस्थल ऐसा ही हो, तो हमें विश्व का धर्मगुरू बनते देर नहीं लगेगी.’

मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि हिन्दू धर्मस्थलों पर अक्सर यह आरोप लगता है कि साफ और सुंदर नहीं है. यहां गंदगी बहुत रहती है और लोगों ने ऐसी आदत बना ली है कि गंदगी वे करें तथा सफाई दूसरे करें. उन्होंने कहा, ‘हम प्रधानमंत्री के स्वच्छता संकल्प को अपनाकर इस आरोप को झूठा साबित कर सकते हैं. दुनिया में जिन देशों ने अपने यहां प्रचुर भौतिक विकास किया है उनका मूल सफाई से ही जुड़ा रहा है. तभी वे आज विकसित देश कहलाने की स्थिति में पहुंचे हैं.’

उन्होंने वृन्दावन के संतों द्वारा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर चलाए जा रहे तोड़-फोड़ अभियान से निजात दिलाने के संबंध में की गई मांग पर कहा, ‘यमुना नदी यहां की पहली प्राथमिकता है. गंगा-यमुना की निर्मलता कायम रखना हमारा नैतिक धर्म भी है. सरकार एनजीटी के आदेशों की समीक्षा कर कोई न कोई बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करेगी.’ मुख्यमंत्री ने यमुना नदी को प्रदूषणमुक्त करने के लिए सरकार के प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा, ‘यमुना को अविरल, निर्मल बनाने के लिए हथिनी कुण्ड से और ज्यादा पानी छुड़वाने के प्रयास किए जाएगे. उसमें गिरने वाले गंदे नालों को रोका जाएगा. यमुना के किनारे यूकेलिप्टस के स्थान पर धार्मिक भावनाओं से जुड़े पीपल एवं बरगद जैसे वृक्ष लगाए जाएंगे.’