काले धन पर करारा वार

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काले धन पर यह करारा हमला है। ताजा कदम के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाया है कि अवैध धन के खिलाफ उनके एलान महज ‘जुमला” नहीं थे। सख्त कदम उठाने में हालांकि कुछ समय लगा, लेकिन देर आयद-दुरुस्त आयद की तर्ज पर अब उनकी सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिससे काला धन रखने वालों की नींद निश्चित ही उड़ गई होगी। ऐसा धन सामान्यत: बड़े नोटों के रूप में रखा जाता है। जिन लोगों ने 500 और 1000 रुपए के नोटों के रूप में इन्हें रखा होगा, अब एक ही झटके में उनका ऐसा धन किसी मोल का नहीं रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के मुताबिक 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक इन नोटों को लोग बैंकों में जमा करा सकेंगे। लेकिन ऐसा कराते ही यह तमाम रकम सरकार की जानकारी में आ जाएगी। ये धन आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक हुआ, तो उसके मालिक पिछले साल काले धन के खिलाफ पारित कानून के तहत सजा के भागी होंगे। इस वर्ष जून से सितंबर तक सरकार ने काला धन की स्वयं घोषणा करने का मौका दिया था। सैकड़ों लोगों ने 65,250 करोड़ रुपए की ऐसी रकम घोषित की। उन्होंने टैक्स तथा जुर्माना चुकाकर उसे वैध धन बना लिया। सरकार कह चुकी है कि जिन्होंने उस मौके का लाभ नहीं उठाया, उनके पास अब दंडित होने के अलावा कोई चारा नहीं है। अब स्थिति यह है कि या तो काले धन के कारोबार में लगे लोग कानून के फंदे में आएंगे या उनके बड़े नोट महज कागज के मूल्यहीन टुकड़े बनकर रह जाएंगे।

बेशक इस फैसले से आम लोगों को भी कुछ परेशानी होगी। कुछ दिनों तक आम लेन-देन में अफरा-तफरी रह सकती है। बैंकिंग व्यवस्था के दोबारा सामान्य बनने में कुछ वक्त लगेगा। इन बातों का जिक्र प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भी किया। लेकिन उन्होंने उचित ही कहा कि यह अर्थव्यवस्था को स्वच्छ करने का महायज्ञ है। मोदी ने इसमें आम लोगों से आहुति मांगी।

इसमें कोई शक नहीं कि भारत के आम जन (जो ईमानदारी से जिंदगी जीते हैं) चंद दिनों की दिक्कतों को सहर्ष स्वीकार करेंगे। अर्थव्यवस्था काले धन से मुक्त हुई, तो आखिर उसका लाभ सबको मिलेगा। कर चोरी रुकेगी तो राजकोष समृद्ध होगा, जिससे जन-कल्याण के कार्य हो सकेंगे। फिर इससे आतंकवादियों पर भी लगाम लगेगी, जो जाली नोटों के जरिए भारत-विरोधी कार्रवाइयों को अंजाम देते हैं।

यह निर्विवाद है कि काला धन हर लिहाज से घातक है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में समाजसेवी अण्णा हजारे के नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान काले धन की बुराइयों की खूब चर्चा हुई थी। इससे इस बुराई के खिलाफ देश में जागरूकता आई। कहा जा सकता है कि उसका ठोस परिणाम अब सामने आया है। अंतत: देश में एक ऐसी शुरुआत हुई है, जिसे अब तक असंभव माना जाता था। इस साहस के लिए मोदी सरकार प्रशंसा की पात्र है|