तीसरे चरण के मतदान में कई नेता दांव पर

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19 फरवरी को तीसरे चरण का मतदान होना है। कुछ नामी चेहरों का भविष्य भी तय होगा। मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव, उनकी छोटी बहू अपर्णा यादव और भतीजे अनुराग यादव हैं। इस दौर के अन्य प्रमुख चेहरे नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल, कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुईं रीता बहुगुणा जोशी और कांग्रेस के कद्दावर नेता पीएल पुनिया के बेटे तनुज पुनिया हैं|

इन स्टार उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर–

शिवपाल सिंह यादव – सपा – जसवंतनग

अपर्णा यादव – सपा – लखनऊ कैंट

रीता बहुगुणा जोशी – भाजपा – लखनऊ कैंट

रविदास मेहरोत्रा – सपा – लखनऊ सेंट्रल

ब्रजेश पाठक – भाजपा – लखनऊ सेंट्रल

अनुराग यादव – सपा – सरोजनी नगर (लखनऊ)

तनुज पुनिया – कांग्रेस – जैदपुर (बाराबंकी)

सतीश महाना – भाजपा – महाराजपुर

नितिन अग्रवाल – सपा – हरदोई

अरविंद कुमार सिंह गोप – सपा – हैदरगढ़

सबसे पहले बात करते हैं जसवंतनगर सीट की..यहां से मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव के पहले और दूसरे चरण में वह सपा प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार करने के लिये एक बार भी नहीं निकले, लेकिन तीसरे चरण में उन्होंने इटावा की जसवंनगर सीट से सपा प्रत्याशी अपने छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव के लिए जमकर वोट मांगे|

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा खुद को सपा अध्यक्ष के पद पर आसीन किये जाने के बाद पार्टी में बदले समीकरण के बीच मुलायम ने जसवंतनगर सीट पर मतदाताओं से कहा कि वो इस सीट पर उनके भाई शिवपाल को जिता दें, क्योंकि यह उनकी इज्जत का सवाल है। अब देखने वाली बात ये होगी कि इस सीट पर किसकी विजय होती है|

लखनऊ कैंट से पहली बार चुनावी मैदान में उतरीं मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव के लिए भी मुलायम सिंह ने वोट मांगे और अपनी इज्जत का हवाला दिया। इस सीट पर अपर्णा की राह इतनी आसान नहीं होगी क्योंकि लखनऊ कैंट से मौजूदा विधायक रीता बहुगुणा जोशी ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा है और वो अपर्णा को सीधे टक्कर देती दिखेंगी|

रीता बहुगुणा भाजपा में शामिल होने से पहले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की अध्यक्ष थीं, उनके भाई विजय बहुगुणा जोशी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे लेकिन कांग्रेस पार्टी और बहुगुणा परिवार की अनबन के चलते भाई-बहन ने कांग्रेस को छोड़ भाजपा को अपना सहारा बनाया|

लखनऊ मध्य सीट की तो पिछले तीन विधानसभा चुनावों में एक बार समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को जीत मिली, जबकि दो बार भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिली। फिलहाल सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। लेकिन इस कब्जे को बरकरार रख पाना मुश्किल लग रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि इस बार सीट पर किसका कब्जा होता है|

पिछले विधानसभा चुनावों की अगर बात करें तो इस सीट से समाजवादी पार्टी के रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा के विद्यासागर गुप्ता को हराया था। कांग्रेस के फकीर सिद्दीकी तीसरे स्थान पर रहे थे। जबकि बीएसपी के मो. नसीम सिद्दीकी चौथे स्थान पर रहे थे। इस बार सपा ने एक बार फिर रविदास मेहरोत्रा पर दांव खेला है जबकि भाजपा ने अपना प्रत्याशी बदल दिया है। भाजपा ने विद्यासागर गुप्ता की जगह ब्रजेश पाठक को मैदान में उतारा है|

सरोजनीनगर क्षेत्र से मुलायम सिंह यादव के भतीजे और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चचेरे भाई अनुराग यादव चुनाव मैदान में हैं। उन्हें भाजपा प्रत्याशी स्वाति सिंह से कडी टक्कर मिल रही है। स्वाती सिंह अपने पति और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती के विवाद की वजह से अचानक सुर्खियों में आईं और उन्हें बसपा अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलने का ईनाम मिला। उन्हें भाजपा ने सरोजनीनगर से प्रत्याशी बना दिया|

जैदपुर सीट पर इस बार काफी कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है। यहां सपा ने अपने विधायक रामगोपाल रावत का टिकट काटकर अपने सहयोगी दल कांग्रेस के तनुज पुनिया को चुनाव लड़ने का मौका दिया है। केमिकल इंजीनियर तनुज कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता पी. एल. पुनिया के बेटे हैं। ऐसे में यह सीट पुनिया के लिये भी प्रतिष्ठा का सवाल है। तनुज को बसपा प्रत्याशी पूर्व विधायक मीता गौतम से तगड़ी टक्कर मिल रही है। इसके अलावा भाजपा के उपेन्द्र सिंह रावत भी कमजोर नहीं हैं|

महाराजपुर विधानसभा सीट की बात की जाए तो यहां पर एक दिलचस्प चीज देखने को मिली है। इस सीट से सपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने अपने उम्मीदवार उतारें हैं जबकि दोनों ही पार्टियां गठबंधन में चुनाव लड़ रही हैं। इसका फायदा भाजपा प्रत्याशी और कानपुर के कद्दावर नेता सतीश महाना को मिल सकता है। दरअसल सतीश महाना ने कानपुर में अपनी छवि बहुत मजबूत बना ली है और हर विधानसभा के लोग उनका नाम लेते हैं। सतीश महाना का ही असर है कि बीजेपी कानपुर नगर की बाकी सीटों के मुकाबले इस सीट पर कुछ आश्वस्त नजर आती है। सतीश महाना की टक्कर बसपा प्रत्याशी मनोज शुक्ला से तय मानी जा रही है|

हरदोई विधानसभा क्षेत्र को समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल का गढ़ माना जाता है। हरदोई सदर से नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल मैदान में हैं। पिछले चुनाव की अगर बात करें तो हरदोई जिले की 8 विधानसभा सीटों में 6 सीटों पर सपा ने अपनी साइकिल का पहिया दौड़ा दिया था जबकि दो सीटों पर बसपा के उम्मीदवार जीते थे। यहां अगर भाजपा की बात करें तो भाजपा को बुरी तरह से मुंह की खानी पड़ी थी और 6 सीटों पर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। लेकिन इस बात चुनावी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं|