केंद्र सरकार में ममता बनर्जी से दार्जिलिंग मुद्दे पर मांगी रिपोर्ट, ममता ने बोला आप दखल न दें

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पहाड़ी इलाकों के स्कूलों में बांग्ला अनिवार्य किए जाने को लेकर शुरू हुआ गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का (जीजेएम) के अनिश्चिताकालीन बंद ने शनिवार को हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। केंद्र ने कहा है कि वह दार्जिलिंग में तब तक और सुरक्षा बल नहीं भेजेगा, जब तक कि ममता सरकार वहां के हालात के बारे में रिपोर्ट नहीं भेजेगी। वहीं पश्चि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार को इस मामले में दखल नहीं देने की चेतावनी दी है।

इससे पहले दार्जिलिंग में भड़की हिंसा के दौरान इंडिया रिजर्व बटालियन के एक डिप्टी कमांडेंट किरण तमांग पर धारदार हथियार से हमला हुआ। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, जीजेएम ने पुलिस पर अपने तीन समर्थकों की हत्या का आरोप लगाया। चार वाहन भी फूंक दिए गए। हालात काबू करने के लिए सेना बुलानी पड़ी। शनिवार को बंद का छठा दिन था। पुलिस के मुताबिक, जीजेएम समर्थकों ने उन पर पत्थर फेंके और गाडिय़ों में आग लगा दी।

ममता बनर्जी ने उच्च स्तरीय बैठक के बाद कहा कि जो हो रहा है उसके पीछे गहरी साजिश है। हथियार एक दिन में नहीं जुटाए गए। आंदोलनकारियों और उग्रवादियों के बीच सांठगांठ है।

जीजेएम चीफ बिमल गुरुंग ने आरोप लगाया कि ममता सरकार की पुलिस गैरकानूनी तरीके से हमारे समर्थकों के घरों में घुस रही है। उन्हें प्रताडि़त किया जा रहा है। आंदोलन और मजबूत होगा।

यहां पर्यटन ही सबसे बड़ा व्यवसाय है। यहां पर्यटक 90 फीसदी घट गए है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की टॉय ट्रेन सेवा स्थगित कर दी गई है।

ऐसे शुरू हुआ विवाद

पिछले महीने ममता सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि राज्य के सभी स्कूलों को 10वीं क्लास तक बांग्ला को अनिवार्य भाषा के तौर पर पढ़ाया जाएगा। जीजेएम ने इसका विरोध किया और इसके साथ ही कई साल पुरानी अलग गोरखालैंड की मांग भी उठाई।