लूट का मामला: छह घंटे न्यायिक हिरासत में रहे गाजियाबाद एसडीएम

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लूट के एक मामले में गाजियाबाद में तैनात एसडीएम चंद्रभान सिंह को अदालत से जमानत मिल गई, लेकिन वह करीब छह घंटे तक न्यायिक हिरासत में रहे।

चंद्रभान सिंह वर्ष 2004 में बांदा सदर में तहसीलदार के पद पर कार्यरत थे। शहर के मुहल्ला गूलर नाका निवासी संत कुमार ने 31 दिसंबर 2004 को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह किसी काम से स्टेशन की तरफ जा रहा था। गुडिय़ा पंडाल स्टेशन के पास तहसीलदार, अमीन सत्यनारायण व अन्य सरकारी गाड़ी से आए और उसे पकड़कर मारने पीटने लगे। जेब में रखे तीन हजार रुपये व सोने की चैन लूट ली। बाद में उसे कोतवाली ले गए। उसने तहसीलदार से काफी पूछा कि पकडऩे का क्या कारण है लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं बताया। वह राजस्व विभाग का बकाएदार भी नहीं है। न ही उसने कभी बैंक आदि से कर्ज लिया है।

पुलिस ने विवेचना के पश्चात तीन जून 2005 में एफआर लगा दी। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट हरिनाथ पांडेय ने एफआर को निरस्त कर आरोपियों को तलब कर लिया। कई बार आरोपियों के विरुद्ध जमानती व गैर जमानती वारंट जारी किए गए, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। दबाव पडऩे पर अमीन ने 22 सितंबर 2016 को अदालत में उपस्थित होकर जमानत करा ली। 24 अक्टूबर को गाजियाबाद सदर के उप जिलाधिकारी चंद्रभान ङ्क्षसह अदालत में उपस्थित हुए और अंतरिम जमानत की याचना की। अदालत ने उन्हें आठ नवंबर तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी। मंगलवार को वह पुन: उपस्थित हुए। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में ले लिया। एसडीएम करीब छह घंटे तक न्यायिक हिरासत में रहे। शाम को करीब 4.30 बजे बीस-बीस हजार की दो मुचलके दाखिल करने पर जमानत दे दी|