मदद के नाम पर फेसबुक पोस्ट पर Like, जानिए हक़ीक़त

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फेसबुक पर अक्सर ऐसी पोस्ट दिखाई देती हैं, जिनमें किसी गरीब, लाचार या दिव्यांग व्यक्ति की फोटो के साथ लिखा होता है कि इसकी मदद करने के लिए ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें। यहां तक कि उकसाने केिए यह भी लिखा होता है कि कोई कठोर दिल वाला ही होगा, जो लाइक नहीं करेगा। यह और कुछ नहीं, लोगों की भावनाओं से खेलने का जरिया होता है। सिंगापुर की समाजसेवी संस्था क्राइसिस रिलीफ सिंगापोर चैरिटी (सीआरएस) ने बाकायदा ऐड कैम्पेन चलाकर बताया कि लाइकिंग इज नॉट हेल्पिंग (लाइक करने से कोई मदद नहीं मिलती)। इस ऐड कैम्पेन की दुनियाभर में तारीफ हुई थी|

क्राइसिस रिलीफ सिंगापोर (सीआरएस) एक समाजसेवी संस्था है, जो वॉलंटियर्स के बल पर काम करती है। उसने विज्ञापन बनवाकर लोगों को बताया कि फेसबुक पर लाइक कर देने से कुछ नहीं होता। संस्था ने अपील की कि वॉलंटियर बनें और एक लाइफ में सकारात्मक बदलाव लाएं। यानी महज लाइक करके संतुष्ट हो जाने के बजाय कोई ठोस काम करें।

सीआरएस के लिए यह विज्ञापन अभियान सिंगापुर की ऐड एजेंसी पब्लिसिस सिंगापोर ने तैयार किया था। इसके पीछे कॉपीराइट डंस्टन ली का दिमाग था। भारतीय मूल के अजय त्रिविक्रमन इसके एग्जीक्यूटिव क्रिएटिव डायरेक्टर थे। 2014 में इस ऐड कैम्पेन को प्रतिष्ठित कांस फेस्टिवल की प्रेस कैटेगरी में गोल्डन लॉयन अवॉर्ड मिला था।

इस ऐड कैम्पेन में रियल फोटोज का इस्तेमाल हुआ था। यानी विज्ञापनों में नजर आ रहे लोग वास्तव में पीड़ित ही थे। उनके चारों तरफ अंगूठा दिखाते हाथ थे। ये अंगूठे फेसबुक लाइक्स के प्रतीक थे। विज्ञापनों में युद्ध, बाढ़ और भूकंप पीड़ितों की तस्वीरें इस्तेमाल की गई थीं।

source-DB