सु-काम के सफलता की कहानी – कुंवर सचदेव की मेहनत और लगन

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कुँवर सचदेव – Kunwer Sachdeva भारत की लीडिंग पॉवर सोल्यूशन कंपनी सु-काम (Su-Kam) Sukam solar inverter के संस्थापक और एम् डी है और साथ ही वे एक महान खोजकर्ता, मार्केटर, प्रेरणादायक वक्ता और उद्योजक भी है। सचदेव के सु-काम के सफलता की कहानी “मेक इन इंडिया” का सबसे अच्छा और सबसे बड़ा उदाहरण है।

सचदेव का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था, लेकिन सचदेव ने कभी भी अपनी आर्थिक परिस्थितियों को अपनी सफलता के बीच में नही आने दिया। और सिर्फ 15 वर्ष की आयु में ही वे एक महान सफल उद्योजक बन गए। अपने व्यवसाय की शुरुवात उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर साइकिल पर पेन बेचते हुए की थी और बाद में उन्होंने एक सफल केबल टीवी कम्युनिकेशन व्यवसाय की स्थापना दिल्ली में की थी। एक खोजकर्ता के रूप में उन्होंने जल्द ही भारत के पॉवर बैकअप इंडस्ट्री के विकास और उनकी जरूरतों को भाँप लिया था और 1998 में ही उन्होंने सु-काम पॉवर सिस्टम की स्थापना करने के लिए केबल टीवी के व्यवसाय को बंद करने की ठान ली।

कुछ ही सालो में कड़ी मशक्कत और महेनत करते हुए उन्होंने आज सु-काम को भारत की मुख्य कंपनियों में से एक बनाया। आज सु-काम इंडियन मल्टीनेशनल कारपोरेशन है और इसे भारत की सबसे विकसित और तेज़ी से बढ़ने वाली इंडस्ट्री में से एक माना जाता है। यह कंपनी तेज़ी से विकसित होने वाली टॉप 500 कंपनियों की सूचि में भी शामिल है। सचदेव ने भी तक़रीबन 90 देशो तक अपनी कंपनी को पहुचाया है और इसका लक्ष्य अफ्रीका और एशिया के ज्यादातर भागो को कवर करना ही है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से मैथमेटिकल स्टेटिस्टिक्स और लॉ की डिग्री हासिल करने के साथ ही और साथ ही बिना किसी टेक्निकल बैकग्राउंड के होने के बावजूद उन्होंने पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स में महारत हासिल कर रखी थी। विविध व्यवसायों को सँभालते हुए भी वे सु-काम (Su-Kam) के आर & डी डिवीज़न के हेड बने।

इंडियन पॉवर बैकअप इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजी और डिजाईन के लिए पेटेंट फाइल करने वाले सचदेव पहले भारतीय उद्योगपति थे। विश्व के पहले प्लास्टिक बॉडी इन्वर्टर के अविष्कार का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है और उनके इस अविष्कार को इंडिया टुडे ने “इनोवेशन ऑफ़ द डिकेड” का भी नाम दिया। कुंवर ने वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजीज जैसे मोस्फेट (MOSFET), माइक्रो कंट्रोलर बेस्ड और DSP साइन वेव का अविष्कार कर पॉवर बैकअप इंडस्ट्री में क्रांति ला दी थी। उन्होंने भारत को “होम यूपीएस” भी दिया जिसमे यूपीएस और इन्वर्टर दोनों के गुण थे। सु-काम (Su-Kam) के आने से पहले इन्वर्टर उद्योग पर 100 से भी ज्यादा लोगो का शासन था जो घटिया माल बेच रहे थे – लेकिन कुंवर ने पुरे इन्वर्टर उद्योग को अपने अविष्कार से चुनौती दी रखी थी।

कुंवर अपनी उपलब्धियों से कभी संतुष्ट नही थे और उनमे हमेशा कुछ नयी टेक्नोलॉजी का अविष्कार करने की भूक लगी रहती। कुंवर को कई बार लगता था की, “यदि वर्तमान में सभी इलेक्ट्रॉनिक टच स्क्रीन और वाय-फाई से जुड़े है तो होम यूपीएस क्यु नही?” इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यूपीएस की टेक्नोलॉजी में बदलाव किये। और आज कुंवर अपना पहला टच स्क्रीन यूपीएस लांच करने के लिए तैयार है जिसमे वाय-फाई की सुविधा भी दी गयी है। एक दिन ऐसा भी होगा शायद ही किसी ने सोचा होगा।

पॉवर बैकअप इंडस्ट्री के विकास में उनके बहुत से महत्वपूर्ण योगदानो को देखते हुए उन्हें “इन्वर्टर मैन ऑफ़ इंडिया” के नाम से भी जाना जाता है।

टेक्नोवेशन के प्रति कुंवर का प्यार हमेशा बढ़ता ही गया था। ग्रीन एनर्जी का निर्माण करने में उन्हें काफी रूचि थी उनकी इच्छा थी की भारत में हर जगह पर ग्रीन एनर्जी का निर्माण होना चाहिए। एक दशक पहले सौर उर्जा के उपकरण आने वाले दशको में क्रांति लायेंगे। उनके घर से सम्बंधित सौर उपकरणों में सोलरकॉन (एक्सिस्टिंग इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर में बदलता है) और ब्रेनी (दुनियाँ का पहला हाइब्रिड सोलर होम यूपीएस) शामिल है।

उन्होंने बहुत से छोटे हाउस रिमोट से लेकर बड़ी इंडस्ट्री के लिए भी सोलर उपकरणों की खोज की है। यूनिक सोलर DC सिस्टम के निर्माण में भी उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। कुंवर के कठिन परिश्रम के बाद ही सु-काम (Su-kam) सर्वाधिक मार्किट शेयर पाने में सफल रही। फ़िलहाल सु-काम का लक्ष्य भारत के हर एक घर को सोलर एनर्जी से जोड़ना है।

उनका मंत्र यही है, “I innovate therefore I am”

बेहतरीन विक्रेता –

सु-काम की स्थापना के पहले वर्षो में ही कुंवर ने मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग के महत्त्व को जान लिया था और इसी वजह से सु-काम अखबार में विज्ञापन देने वाली पहली इन्वर्टर कंपनी बनी। कुंवर के पॉवर सोल्यूशन सेक्टर में आने से पहले किसी भी कंपनी का विशिष्ट प्रोडक्ट मैन्युअल या कैटेलॉग नही था लेकिन कुंवर ने इसे बदलकर सु-काम के सभी प्रोडक्ट का एक बेहतरीन और आकर्षित मैन्युअल प्रोडक्ट बनाया था।

कुंवर ने अपमी कंपनी सु-काम के लिए बेहतरीन मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बना रखी थी और इससे पहले किसी कंपनी ने मार्केटिंग स्ट्रेटेजी नही बनायी थी लेकिन इसके बाद 90 के दशक में सभी ने उनके रास्तो पर चलते हुए मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाना शुरू किया। और इसके बाद सु-काम प्रसिद्ध ढाबो के बोर्ड स्वयं बनाकर उन्हें गिफ्ट करती थी और उनपर अपने उपकरणों का विज्ञापन भी देती थी। इसके पीछे एक कहानी भी है जिसके अनुसार एक बार कुंवर कश्मीर में दाल सरोवर देखने गए थे और वहा उन्होंने बहुत सी खुबसूरत “सीकर नाव” भी देखि और अगले ही दिन वे सभी नाव सु-काम में परिवर्तित हो गयी।

कुंवर उन महान उद्योजको में से एक है जिन्होंने इंटरनल ब्रांडिंग के महत्त्व को समझा। कुंवर ने सु-काम कल्चर को इस तरह से सजाया था की उनका पूरा स्टाफ सभी त्यौहार (इसमें सु-काम का खेल सप्ताह भी शामिल है) ख़ुशी से मनाते थे, उनका स्टाफ किसी बड़े परिवार से कम नही था।

एतव और अभिनेता रवि किशन के साथ मिलकर कुंवर ने अपना पहला रियलिटी टीवी शो इंडिया ग्रेटेस्ट सेल्समेन – सेल का बाज़ीगर भी लांच किया। इससे पहले विक्रेता लोगो को प्रेरित करने के लिए किसी ने भी इस तरह के शो को नही देखा था। इस शो को बहुत लोगो ने पसंद किया और हजारो और लाखो लोगो ने इसमें भाग लिया। और इसके विजेता आज सु-काम में काम करते है।

भारतीय ब्रांड को वैश्विक बनाना –

कुंवर सचदेव का हमेशा से ही यह मानना था की यदि आप सपने देख सकते हो तो तो आप उन्हें पूरा भी कर सकते हो। और उनकी इसी सोच ने सु-काम को भारत की सबसे बड़ी पॉवर बैकअप सोल्यूशन कंपनी बनाया। वे अपने इस भारतीय ब्रांड को वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध करने चाहते थे और ऐसा करने में वे सफल भी हुए। अपने ब्रांड को वैश्विक स्तर पर फ़ैलाने के लिए उन्होंने कई विदेश यात्राये भी की थी।
कुंवर के मार्गदर्शन में ही सु-काम तक़रीबन 90 देशो में स्थापित हो सकी। सु-काम अब इंटरनेशनल ब्रांड बन चूका था और इसके साथ ही अफ्रीका और नेपाल जैसे देशो में सु-काम को कई अवार्ड भी मिले। अफ्रीका में लोग चीनी और अमेरिकन कंपनियों की तुलना में इस “मेड इन इंडिया” ब्रांड पर ज्यादा भरोसा करते है।