लखनऊ में केजीएमयू के चिकित्सकों ने आंत के ऑपरेशन में किडनी निकाली

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बेहतर इलाज के लिए लखनऊ आए एक युवक का किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में ऐसा इलाज किया गया कि अब वह जीवन भर पछताएगा। यहां आंत का आपरेशन कराने आए युवक की चिकित्सकों ने एक किडनी ही गायब कर दी।

बाराबंकी निवासी 23 वर्षीय युवक ट्रैक्टर पलटने से घायल हो गया था। उसे गंभीर हालत में बाराबंकी जिला अस्पताल से केजीएमयू यह कहकर रेफर किया गया कि आंत में गंभीर चोट है। लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कर युवक की जांच कराई गई। फटी आंत को रात में ही रिपेयर कर दिया गया, लेकिन हालत में पूरी तरह सुधार नहीं हुआ। पेट में लगातार दर्द बना रहा।

दो वर्ष बाद स्थिति अधिक बिगडऩे पर जब मरीज को निजी चिकित्सक को दिखाया गया और अल्ट्रासाउंड हुआ तो दायीं किडनी गायब थी। यकीन करने को दो जगह पुन:अल्ट्रासाउंड जांच कराई गई, लेकिन रिपोर्ट एक जैसी ही रही। केजीएमयू में ऑपरेशन से पहले अल्ट्रासाउंड में दोनों किडनी मौजूद थीं। अब मरीज के परिवारीजन किडनी चोरी का आरोप लगा रहे हैं। मामले की जांच के लिए बाराबंकी पुलिस और न्यायालय से गुहार लगाई गई है।

बाराबंकी के भवानी बक्स मजरा निवासी पृथ्वीराज (23) पुत्र राजाराम ट्रैक्टर चला रहा था। इसी वक्त ट्रैक्टर के पलटने से वह घायल हो गया। 19 फरवरी, 2015 को हुए हादसे में पृथ्वीराज को लेकर परिजन बाराबंकी जिला अस्पताल भागे। यहां एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दिखाया तो यहां इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने आंत फटी बताकर केजीएमयू रेफर कर दिया। आरोप है कि भाई विमलेश व मौसी रामदुलारा को बाराबंकी अस्पताल के चिकित्सक ने केजीएमयू में परिचित डॉक्टरों का हवाला देकर मदद का भी आश्वासन दिया। साथ ही एंबुलेंस से केजीएमयू भेजकर खुद रात में ऑपरेशन के वक्त मौजूद रहा।

19 फरवरी, 2015 को पृथ्वीराज दोपहर करीब ढाई बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। कैजुअल्टी में पहुंचते ही पृथ्वीराज का अल्ट्रासाउंड समेत रक्त संबंधी जांचें कराई गईं। इसमें दाहिनी व बायीं, दोनों किडनी मौजूद थीं। आंत का ऑपरेशन रात में ही करने का फैसला किया गया। डॉक्टरों ने ट्रॉमा सेंटर में रात 11:45 पर मरीज को ओटी में शिफ्ट कर ओपेन सर्जरी की। इसके बाद सुबह साढ़े छह बजे मरीज को बाहर निकाला गया।

परिजनों का कहना है कि 19 फरवरी, 2015 से भर्ती पृथ्वीराज की हालत ऑपरेशन के बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं हुई। ऐसे में डॉक्टरों ने एक माह तक भर्ती रखा। 20 मार्च, 2015 को पृथ्वीराज को डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद मरीज कमजोरी, पेट में दर्द आदि की शिकायत होने पर केजीएमयू का चक्कर लगाता रहा। डॉक्टर उसे ऑपरेशन होने का हवाला देकर जल्द ठीक होने का आश्वासन देते रहे।

ऑपरेशन के बाद पेट दर्द की समस्या बनी रहने और धीरे-धीरे कमजोरी का शिकार होने पर पृथ्वी राज ने एक स्थानीय डॉक्टर की सलाह पर 15 अप्रैल, 2017 को जब अल्ट्रासाउंड कराया तो पहली बार दायीं किडनी गायब होने का पता चला। विश्वास न होने पर उसने 17 अप्रैल को अल्ट्रा डायग्नोस्टिक सेंटर पर दोबारा जांच कराई। यहां भी जांच रिपोर्ट में दायीं किडनी नदारद बताई गई तो मालूम हुआ कि किडनी नहीं है।

पुलिस अधीक्षक, बाराबंकी, वैभव कृष्ण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि इस तरह के मामलों में बिना विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराए सीधे मुकदमा न दर्ज किया जाए। प्रकरण लखनऊ से संबंधित है इसलिए मुकदमा भी वहीं दर्ज होना चाहिए।

केजीएमयू के वाइस चांसलर, प्रोफेसर एमएलबी भट्ट ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में आया है। चूंकि ऑपरेशन 2015 में हुआ था। इसलिए इस पर अभी कुछ कह नहीं सकता हूं। मैंने प्रो. नरसिंह वर्मा को मरीज के इलाज की फाइल निकलवाकर जांच के आदेश दिए हैं।

source-DJ