मुस्लिम बहनों की फिक्र करने वाले लोगों को मथुरा, हरिद्वार और काशी में भीख मांगने वाली बहनों के बारे में भी सोचना चाहिए

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एडवोकेट जिलानी ने कहा कि तलाक मुसलमानों का जाति और दो परिवारों के बीच का मामला है। जितना कुछ हो नहीं रहा है, उससे कहीं ज्यादा तलाक के मामले प्रचारित किए जा रहे हैं। इसे मुद्दा बनाकर इस्लाम को बदनाम किया जा रहा। इसकी आड़ में राजनीतिक हित साधे जा रहे हैं, जो अच्छी बात नहीं है। एक साथ तीन तलाक पर रोक के लिए सरकार की तरफ से दस मुल्कों में कानून लागू होने का हवाला दिया जा रहा है। बोर्ड भी इन मुल्कों में तलाक के कानून अपने स्तर से पता कर रहा है। कानूनी लड़ाई को मजबूती से लड़ने के लिए वकीलों की टीम लगाई गई है। जहां तक तीन तलाक का सवाल है तो शौहर को इसका अधिकार है लेकिन शरीयत ने तीन तलाक को गलत करार दिया है। इससे मुस्लिम समाज के उन लोगों को वाकिफ कराने की जरूरत है, जो अनभिज्ञ हैं।

रविवार रात जमाते इस्लामी हिंदू की तरफ से बरेली के फाइक इंक्लेव में बेदारी अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिलानी ने कहा कि मुस्लिम बहनों की फिक्र करने वाले लोगों को मथुरा, हरिद्वार और काशी में भीख मांगने वाली बहनों के बारे में भी सोचना चाहिए। बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि तीन तलाक इतना बड़ा मुद्दा नहीं है, जितना बड़ा बनाकर उस पर राजनीति की जा रही है। सरकार गरीबी, अशिक्षा और चिकित्सा जैसे मसलों पर जनता का ध्यान तीन तलाक के मुद्दे पर लाकर भटकाने का काम कर रही है।