वाराणसी में 5 महीने तक मां की डेडबॉडी को घर में रखा

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काशी में बेटे ने अपनी मां की डेडबॉडी को पांच महीने तक घर पर छुपाकर रखा, बुधवार को पड़ोसियों की शिकायत पर पुलिस ने घर खुलवाया तो सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस के मुताबिक मृतका को 18 हजार रुपए पेंशन मिलती थी, जिसके लिए बच्चों ने उनकी मौत की बात छुपाई। मामले की जांच की जा रही है।

वाराणसी के भेलूपुर थाना अंतर्गत कबीर नगर निवासी अमरावती देवी अपने बेटे रवि प्रकाश, देव प्रकाश और योगेश्वर के साथ रहती थीं। उनके पति दयाशंकर कस्टम डिपार्टमेंट में सुपरिटेंडेंट के पद पर थे। उनके 5 बेटे और एक बेटी हैं। बुधवार को पड़ोसियों ने रवि प्रकाश के घर से सड़ने की तेज बदबू आने पर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। मौके पर पहुंची पुलिस जब घर का दरवाजा तोड़कर अंदर गई तो बेड पर एक कंकाल मिला।

पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि बेटों ने पेंशन के लालच में अपनी मां की डेडबॉडी छुपाकर रखी थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मृतक महिला की बेटी विजयलक्ष्मी ने बताया, “मेरे पिता 1998 में रिटायर हुए थे और साल 2000 में उनकी मौत हो गई। हमारा पूरा परिवार साथ में रहता है। मेरे सबसे बड़े भाई का नाम रवि प्रकाश है। वो कुछ कमाते नहीं हैं। उनसे छोटे देव प्रकाश और योगेश्वर हैं। सबसे छोटे भाई का नाम ज्योति प्रकाश है। घर खर्च के लिए देव प्रकाश ट्यूशन पढ़ाते हैं और पिताजी की पेंशन मिलती है, जिसे बड़े भाई रवि प्रकाश बैंक से रिसीव करते हैं। पांच में से चार भाइयों ने शादी नहीं की है। सिर्फ देव प्रकाश की पत्नी और बच्चे हैं, जो मां के साथ ही रहते थे।”

“ऐसा कुछ नहीं है कि पेंशन के लिए हमने मां की डेडबॉडी रखी। मेरी मां की मौत नहीं हुई है। हमें 13 जनवरी को जांच के बाद डॉक्टरों ने कहा था कि आपकी मां कोमा में हैं। हमें लगा था कि मर गई हैं, इसलिए अंतिम संस्कार की तैयारी तब की थी, लेकिन पंडितों ने कहा था कि जब तक शरीर में थोड़े से भी प्राण हैं, अंतिम संस्कार नहीं हो सकता। हमें डॉक्टर ने कुछ दवाएं दी थीं, जिन्हें अभी तक हम इन्हें लगा रहे थे। उनके इलाज में काफी पैसा खर्चा हुआ है और वो जीवित हैं। मैं दावे से कहती हूं कि पोस्टमॉर्टम हुआ तो वो जीवित पाई जाएगी।”

मृतका के बेटे ज्योति प्रकाश परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रहती हैं। बहन के मुताबिक इसी साल 13 जनवरी को वे कहीं और रहने चले गए।

पड़ोसी छेदी लाल ने बताया, “दिसबंर 2017 में अमरावती बीमार पड़ी थीं। हम सभी लोगों ने बीएचयू में इनको भर्ती कराया था। कुछ दिनों बाद ये लोग मां को लेकर कहीं चले गए थे। 13 जनवरी को इनकी मां की मौत हो गई थी। अर्थी और अंतिम संस्कार के सारे सामने भी आ गए थे, लेकिन कुछ ही देर बाद सभी भाईयों ने कहा कि हमारी मां जिंदा है और इसका इलाज कहीं और कराएंगे। इस घटना के बाद परिवार के सदस्यों ने लोगों से मिलना छोड़ दिया था।”

भेलूपुर थाने के सीओ अयोध्या प्रसाद ने बताया, “ऐसा बताया जा रहा है कि अमरावती देवी की मौत 13 जनवरी को हुई थी और उनकी पेंशन करीब 18 हजार रुपए के आसपास थी। हम इसकी जांच कर रहे हैं। पुष्टि होने पर आगे कार्रवाई की जाएगी।”