सहारनपुर में भाईचारे की मिसाल, ठाकुरों और दलितों ने मिलकर दो दलित लड़कियों की कराई शादी

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सहारनपुर में हिंसा और तनाव के बीच दलितों और ठाकुरों ने भाईचारे की मिसाल पेश की है. ज़िले के शब्बीरपुर गांव में ठाकुरों और दलितों ने मिलकर दो दलित लड़कियों की शादी कराई है. पुलिस प्रशासन के मुताबिक, दोनों समाज के लोगों के एक साथ आने से हालात सुधरने में मदद मिलेगी.

शब्बीरपुर गांव में दलित परिवार की दो सगी बहनों की शादी बड़ी धूमधाम से की गई. खास बात ये है कि इस शादी में ठाकुर समाज के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. जिन दो लड़कियों की शादी हुई है उनका नाम मनीषा और प्रीती है. इस दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे.

शादी में आए लोगों ने माना है हिंसा की वजह से इलाके में तनाव है, इसलिए शादी में कम ही रिश्तेदार शामिल हुए हैं लेकिन गांव में फिलहाल शांति है.

सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में पांच मई को उस वक्त झड़पें शुरू हो गई थीं जब गांव के कुछ दलित निवासियों ने ठाकुरों(अगड़ी जाति के लोगों) की ओर से राजपूत राजा महाराणा प्रताप की जयंती पर एक जुलूस निकालने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था.

इसके बाद दलित समुदाय के लोगों ने शहर के गांधी उद्यान में नौ मई को एक महापंचायत करने की कोशिश की, ताकि पांच मई की झड़पों में प्रभावित हुए लोगों के लिए मुआवजे और राहत की मांग की जा सके, लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें महापंचायत आयोजित करने की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण दलित समुदाय सड़कों पर उतर गया. फिर हुई हिंसा में दलित प्रदर्शनकारियों ने शहर में कथित तौर पर एक पुलिस चौकी और एक दर्जन से ज्यादा बाइकों को आग के हवाले कर दिया.

सहारनपुर में दलितों की अगुवाई भीम आर्मी नाम का संगठन कर रहा था. रविवार को हजारों दलित अधिकार कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया था. भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर भी इस मौके पर मौजूद थे. उन पर सोशल मीडिया में एक आपत्तिजनक वीडियो साझा करने और सहारनपुर में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप है.

source-ABP