राम रहीम के डेरा से 20 हजार में शव भी बिकते थे

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राम रहीम के डेरा से शवों को बेचा भी जाता था। लखनऊ में तमाम प्राइवेट मेडिकल कालेज के साथ ही चर्चा में आए जीसीआरजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंस में 20 हजार रुपए में शव भेजे जाते थे। शुक्रवार को राम रहीम के डेरे से जीसीआरजी कॉलेज में 14 शवों के आने की जानकारी मिलने के बाद से खलबली मच गई थी। कॉलेज में मार्च 2017 से जून माह तक करीब 14 शव आए थे।

शव के बदले में रुपये कॉलेज की ओर से एंबुलेंस सेवा को दिए जाते थे। पड़ताल में पुलिस को सिरसा के डीएमसी अस्पताल के एक एंबुलेंस सर्विस की पर्ची मिली है। आशंका जताई जा रही है कि सिरसा से जितने भी शव लखनऊ भेजे गए हैं, उसके लिए एक ही अस्पताल की एंबुलेंस सेवा का प्रयोग किया गया है।

जीसीआरजी कॉलेज ने जो कागज उपलब्ध कराए हैं, उसमें एक शव को ले आने के लिए 19,175 रुपये देने का जिक्र है। एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने वाला अस्पताल शव भेजने के लिए नौ रुपये प्रति किलोमीटर चार्ज करता था।

सिरसा से बिना डेथ सर्टिफिकेट के वाहनों से सिर्फ 14 शव ही लखनऊ नहीं भेजे गए हैं बल्कि यह संख्या करीब 100 से ज्यादा है। सूत्रों का कहना है कि जीसीआरजी के अलावा लखनऊ के लगभग अधिकांश निजी मेडिकल कॉलेज सिरसा से शव मंगाते थे।

खास बात यह है कि बिना डेथ मेमो के शव सैकड़ों किलोमीटर से यहां आते थे और इसकी भनक भी पुलिस को नहीं लगी। इस पूरे प्रकरण ने पुलिस की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। फिलहाल जीसीआरजी कॉलेज डेथ सर्टिफिकेट के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजधानी पुलिस ने कॉलेज में जाकर पड़ताल की। इस दौरान एएसपी ग्रामीण डॉ. सतीश कुमार ने सभी शवों का निरीक्षण भी किया। पुलिस के मुताबिक सभी शव फार्मेलीन में सुरक्षित रखे हैं। मृतकों के आइकार्ड के माध्यम से उनके घरवालों से संपर्क किया जाएगा। शव दान करने वाले लोगों से भी पूछताछ की जाएगी।

उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ डॉ. जीएस बाजपेई ने भी कल कॉलेज प्रशासन से सारे दस्तावेज मांगे। सीएमओ के अलावा पुलिस ने भी जीसीआरजी कॉलेज से सभी 14 मृतकों के नाम, पता और उसे दान करने वालों की जानकारी मांगी है।

कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी आसिफ अत्ताउल्लाह खान के मुताबिक सीएमओ की ओर से मांगे गए कागजात उन्हें उपलब्ध करा दिए गए हैं। जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है।