बिजनौर में पंचायत ने लड़की की शादी में दावत नहीं देने पर हुक्का-पानी बंद किया

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बेटी की शादी में दावत न देने पर बिरादरी की पंचायत ने एक परिवार का हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुना दिया। पंचों की अमानवीयता से आहत पिता ने पुलिस से शिकायत की तो एसपी ने मानवाधिकार हनन और सामाजिक अपराध के इस मामले में दखल देने से ही इन्कार कर दिया। एसपी के गैर जिम्मेदाराना बयान से खफा एडीजी ने कहा है कि बेहद गंभीर मामले में कार्रवाई न करने वाले पुलिस कर्मियों की जांच कराएंगे।

रेहड़ थाना क्षेत्र के गांव जाब्तानगर निवासी रमेश की बेटी की बरात 23 अप्रैल को गांव में आई थी। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने पर जैसे-तैसे इंतजाम कर उन्होंने बेटी को विदा किया। शादी में गांव के चंद लोगों को ही न्योता देने से बिरादरी के लोग क्षुब्ध थे। 14 मई को बिरादरी के लोगों ने गांव में इसे लेकर पंचायत बुला ली। रमेश समेत उनके परिवार को भी बुलाया गया। रमेश का कहना है कि पंचों ने बिरादरी को अलग से शादी की दावत देने का दबाव बनाया, लेकिन मैंने कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इन्कार कर दिया। इस पर पंचायत ने मेरे परिवार को हुक्का-पानी बंद करने का फरमान सुना दिया। मैंने थाना पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई तो अनसुनी कर दी गयी।

एसपी अतुल शर्मा तो अधीनस्थों से चार कदम आगे निकले। मामला संज्ञान में लाने पर उनका तर्क था कि यह मामला तो पूरी तरह सामाजिक है। यह तो कोई अपराध ही नहीं है। लिखित में कोई शिकायत आती है तो देखा जाएगा। इसमें पुलिस की कोई भूमिका ही नहीं बनती।

अगर ऐसा हुआ है तो मामला बेहद गंभीर है। एसपी बिजनौर को निर्देशित किया जाएगा कि वे जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई न करने वाले पुलिसकर्मियों की भी जांच कराई जाएगी।