बिहार में बीजेपी-जेडीयू बराबर सीटें पर लड़ेंगे, कई दिग्गजों के साथ कुशवाहा-पासवान को भी लगेगा झटका

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अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए बिहार एनडीए में पिछले कई महीनों से उठापटक जारी है। नीतीश कुमार बीजेपी पर लगातार दबाव बनाए हुए थे कि बिहार में उनकी पार्टी बड़े भाई की भूमिका में ही रहेगी और बीजेपी से कम सीटों पर किसी कीमत पर चुनाव नहीं लड़ेगी, फिलहाल उनका दबाव रंग लाया है और बीजेपी ने इस बात पर सहमति जताई है कि बिहार में वह जेडीयू के बराबर सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से ऐलान किया कि बिहार में बीजेपी और जेडीयू बराबर सीटों पर लड़ेंगी। बाकी के सहयोगी दलों को भी सम्मानजनक सीटें मिलेंगी। हालांकि किसको कितनी सीटें मिलेंगी अभी नहीं बताया गया है। इसे 2-3 दिन में बता दिया जाएगा।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बिहार में एनडीए के घटक दलों में किसी भी तरह के मतभेद को खारिज करते हुए कहा कि उपेंद्र कुशवाहा और रामविलास पासवान भी साथ ही रहेंगे, लेकिन उनकी अगली बात इन दोनों ही छोटी पार्टियों के लिए परेशानी की बात है। अमित शाह ने आगे कहा कि जब कोई नया सहयोगी दल गठबंधन में जुड़ता है तो सभी के सीट शेयर में कमी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष दुष्प्रचार कर रहा है, जिसका कोई आधार नहीं है।

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में बीजेपी-जेडीयू बराबर सीटों पर लड़ेंगी, बाकी सीटों के लिए बातचीत अंतिम दौर में चल रही है और 2-3 दिनों में किसको कितनी सीट और कौन-कौन सी सीट मिलेंगी, इसका ऐलान हो जाएगा। बराबरी का मामला होने से यह तो साफ है कि बीजेपी को पिछली बार के मुकाबले कम सीटों पर लड़ना होगा, ऐसे में बिहार बीजेपी के कई दिग्गजों का पत्ता कटना तय है क्योंकि पिछली बार बिहार की 40 सीटों में से 22 पर तो अकेले बीजेपी ने ही जीत दर्ज की थी। साफ है कि बीजेपी के कम से कम 6 से 8 लोगों को इसस बार टिकट नहीं मिलेगा।

पिछले लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी ने 3 सीटें जीती थीं और राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने 6 सीटें जीती थीं। सवाल है कि क्या इनकी सीटों में भी कमी आएगी, और अगर आएगी तो फिर इनके लिए बचेगा क्या। अगर इन दोनों नेताओं को कम सीटें मिलीं तो इनका अगला रुख भी देखने वाला होगा।

वैसे सत्ता के गलियारों से जो सनी-सुनाई खबरें आ रही हैं उनके मुताबिक जेडीयू और बीजेपी राज्य में 17-17 सीटों पर लड़ेंगी। रामविलास पासवान की पार्टी 4 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 2 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। 40 सीटों का बंटवारा भी नए सिरे से होगा और इसमें इन दलों के बीच कई सीटों की अदला-बदली भी हो सकती है। इस बंटवारे में फायदे में हैं तो सिर्फ नीतीश कुमार जिनकी जेडीयू पिछली बार सिर्फ 2 सीटें ही जीत सकी थी लेकिन उन्होंने बिहार में बीजेपी को सत्ता का हिस्सेदार बनाया है, इसका उन्हें इनाम भी मिलना ही चाहिए।