अगर बाढ़ से कोई जनहानि हुई या फिर कोई भी भूखा सोया तो प्रशासन दोषी: मुख्यमंत्री

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बाढ़ से प्रभावित इलाकों के दौरा पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा है लेकिन इसे पहले से व्यवस्थित कर इसके नुकसान से बचा जा सकता है। सरकार समस्या का समयबद्ध तरीके से समाधान करने को प्रयासरत है। नेपाली नदियों और शारदा के प्रकोप को रोकने के लिए देश व प्रदेश की सरकारें गंभीरता से विचार कर रही हैं। लेकिन अगर बाढ़ से कोई जनहानि हुई या फिर कोई भी बाढ़ पीड़ति भूखा सोया तो इसके लिए सीधे तौर प्रशासन को दोषी माना जाएगा।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा बाढ़ग्रस्त लखीपुर की धौरहरा तहसील के गांव सिसैया में बाढ़ राहत सामग्री वितरण के दौरान योगी ने एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने छह ऐसे ग्रामीणों को पंचानवे हजार एक सौ रुपए का स्वीकृत पत्र भी दिया जिनके पक्के घर कट गए थे। बाढ़ व किसी भी आपदा से निबटने को सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। ये प्रशासन का काम है और जनप्रतिनिधियों की निगहबानी होगी कि वे हालातों पर गंभीरता से नजर रखें।

मुख्यमंत्री ने कहा कहा कि उनके पास टीआर- 27 की व्यवस्था है जिसे भरकर भेजते ही पैसा जितना डिमांड किया जाएगा तत्काल उपलब्ध हो जाएगा। योगी ने अपने कोई 12 मिनट के भाषण में कहा कि बाढ़ ग्रस्त इलाकों में एनडीआरएफ और पीएसी की पर्याप्त टीमें जिले में उपलब्ध कराई गई हैं। जो लगातार हालात पर नजर रखे हैं और हर जरुरतमंद को तत्काल सुरक्षित ठिकानों पर पहुचाने का काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि एक भी शिकायत अगर उनके पास आ गई की बाढ़ राहत में कोई लापरवाही बरती जा रही है तो जिम्मेदार को छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि हर हाल में प्रदेश की सरकार सभी बाढ़ पीड़तिों के साथ खड़ी है और उनके हर दुख दर्द में उनका साथ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि खीरी जिले में पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं और आने वाले समय में उसको भी विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाढ़ से जिस गरीब का घर जाएगा उसे अभी फौरी राहत और आने वाले वक्त में उसे पीएम आवास योजना के तहत पक्का मकान भी दिया जाएगा।