दलित परिवारों के बौद्ध धर्म अपनाए जाने पर प्रशासन के अफसर हरकत में, रिपोर्ट तलब

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सहारनपुर में दलित बनाम ठाकुरों में विवाद को लेकर मचे घमासान के बीच बरेली में भी अलर्ट घोषित किया गया है। शासन ने तीन दिन पहले दलितों के बौद्ध धर्म अपनाने पर संज्ञान लेते हुए उसकी रिपोर्ट तलब की तो हड़कंप मच गया। गुरुवार को जांच के लिए एसीएम और सीओ इज्जतनगर के बुद्ध विहार में दलित नेताओं से मिलने पहुंच गए। रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।

हाल ही में 150 दलित परिवारों के बौद्ध धर्म अपनाए जाने का मामला प्रकाश में आया था। बाकायदा इसका कार्यक्रम भी हुआ। बौद्ध धर्म से जुड़े कुछ संगठनों के नेताओं ने इस बात को कुबूल भी किया। कहा कि दलित इज्जत की खातिर बौद्ध धर्म अपनाने को मजबूर हैं।

हालांकि इसी धर्म से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने इसका खंडन भी किया लेकिन यह मामला शासन तक पहुंच गया। बताया जाता है कि सैकड़ों दलित परिवार और बौद्ध धर्म अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए भी कार्यक्रम होगा।

शासन के रिपोर्ट तलब करने के बाद प्रशासन के अफसर हरकत में आ गए। अभिसूचना इकाई को एलर्ट करते हुए संबंधित एसीएम और सीओ को जांच के लिए भेजा गया। दोपहर में आदेश हुए और शाम तक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया। अफसरों ने बुद्ध विहार जाकर दलित नेताओं से मिलकर उनकी पूरी बात सुनी। उसके बाद डीएम को रिपोर्ट भेज दी गई है।

भारतीय बौद्ध महासभा के मंडल अध्यक्ष जागन सिंह राकेश कहते हैं कि संविधान में बौद्ध को एक पंथ दर्शाया गया है। यह हिंदू धर्म की शाखा है, उससे अलग नहीं है। जीवन जीने की यह प्रक्रिया है। जो भी लोग भगवान बुद्ध के जीवन से प्रेरित हैं वह दीक्षा लेते हैं लेकिन इसे धर्म परिवर्तन नहीं कहा जा सकता है।