उपेंद्र कुशवाहा के साथी रहे नागमणि एक महीने में ही सबसे बड़े ‘दुश्मन’ कैसे बन गए?

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लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही अब नेताओं की बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी कड़ी में कुछ हफ्तों पहले तक राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के सहयोगी रहे और पार्टी के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि ने उन पर बेहद तीखा हमला बोला है। नागमणि ने उपेंन्द्र कुशवाहा को चुनौती देते हुए कहा है कि उपेंद्र कुशवाहा जहां से चुनाव लड़ेंगे, वही से वह भी चुनाव लड़ेंगे और हराएंगे।


सिर्फ इतना ही नहीं नागमणि का दावा है कि उपेंद्र कुशवाहा के साथ के 80 फीसदी नेता पार्टी छोड़ देंगे। बेहद तल्ख शब्दों में उन्होंने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा में हिम्मत है तो वह काराकाट से लड़ें, कुशवाहा पहले भी बकरी थे, मैंने बाघ का खाल पहनाकर शेर बनाया था। मेरे बिना फिर बकरी बन गए। नागमणि का आरोप है कि कुशवाहा अपनी पत्नी को काराकाट और खुद उजियारपुर से लड़ना चाहते हैं।


अब सवाल उठता है कि चंद हफ्तों पहले तक उपेंद्र कुशवाहा के साथ रहे नागमणि उनके इतने बड़े विरोधी कैसे हो गए। फरवरी के पहले हफ्ते में जब उपेंद्र कुशवाहा पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए थे तो यही नागमणि थे जिन्होंने बिहार बंद का ऐलान किया था, लेकिन चंद दिनों बाद जब पार्टी से अलग हुए तो यही नागमणि बोले कि दो फरवरी को मार्च के दौरान कुशवाहा पर कोई लाठीचार्ज ही नहीं हुआ था। नागमणि ने उपेंद्र कुशवाहा पर पैसे लेकर टिकट बेचने का भी आरोप लगाया।


फरवरी की शुरूआत में ही नागमणि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में एक मंच पर नजर आए थे। नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के संबंधों को हर कोई जानता है। नागमणि के नीतीश कुमार के साथ दिखने को रालोसपा ने पार्टी विरोधी माना।


राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा का कद भले ऊंचा हो लेकिन नागमणि इसे कभी स्वीकार नहीं कर पाए, कुशवाहा को वह हमेशा जूनियर ही मानते रहे। रालोसपा में वह कार्यकारी अध्यक्ष थे, ऐसे में वह सवाल पूछा जाना बर्दाश्त नहीं कर पाए। अपने बचाव में उन्होंने यह जरूर कहा कि वह कार्यक्रम उनके पिता जगदेव प्रसाद से संबंधित थे, इसीलिए वह गए थे।


रालोसपा के बिहार प्रदेश प्रधान महासचिव सत्यानंद प्रसाद दांगी ने नागमणि के आरोपों पर कहा था कि नागमणि खुद अपने लिए और अपनी पत्नी के लिए पार्टी से टिकट चाह रहे थे। इसके लिए वे लगातार दबाव बना रहे थे लेकिन पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के मना करने के बाद वे पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल हो गये। दांगी ने कहा था कि नागमणि ने पार्टी लाइन से हट कर कई बार बयान दिये, जिसका पार्टी को नुकसान हो रहा था। उन्होंने खुद को बड़े जनाधार वाला नेता कहने पर नागमणि से सवाल किया था कि उन्हें पिछले चुनाव में कितने वोट आये थे, इसका खुलासा करना चाहिए।


नागमणि और उपेंद्र कुशवाहा के बीच पिछले एक महीने में जो कुछ चल रहा है वह बिल्कुल साफ है। एक वक्त नीतीश कुमार को नेता तक नहीं मानने वाले नागमणि अब नीतीश में खुल कर आस्था जता रहे हैं इससे भी सबकुछ साफ हो जाता है। हालांकि कुशवाहा समाज के दो नेता जब आमने-सामने खड़े होंगे तो एक दूसरे को नुकसान ही पहुंचाएंगे, इसमें भी दो राय नहीं।