उत्तर प्रदेश पुलिस पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, देखें हाई कोर्ट का आदेश

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पुलिस की बर्खास्तगी को हाईकोर्ट पर फैसला सुना दिया है। अब उत्तर प्रदेश में बिना प्रारंभिक जांच के अधीनस्थ रैंक के पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी या उनकी रैंक में कटौती नहीं की जाएगी। शासन ने 10 अप्रैल को यह शासनादेश जारी कर दिया था। यह जानकारी प्रमुख सचिव गृह ने शुक्रवार को हाई कोर्ट के सामने व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर दी।

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पुलिस महकमे के आला अधिकारियों द्वारा जान बूझकर कानून की अनदेखी करते हुए बर्खास्तगी जैसे आदेशों को जारी करने पर गहरी चिंता जताई थी। उच्च न्यायालय ने कहा कि नियम कायदों के रहते हुए सूबे में पुलिस के आला अधिकारी ऐसे आदेश क्यों जारी कर रहे हैं। अदालत ने ऐसे मामलों को गम्भीरता से लेते हुए राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से मंगलवार 11 अप्रैल को तलब किया था। जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय के अनुसार पुलिस नियमावली के नियम 8 (3) बी में प्रावधान है कि किसी भी पुलिसकर्मी को बर्खास्त करने अथवा दण्ड देने से पहले जांच (इन्क्वायरी) आवश्यक है। फिर भी आला अधिकारियों द्वारा बिना जांच किये सीधे बर्खास्तगी जैसे आदेश कैसे जारी कर दिए जाते हैं।

सिपाही रितेश कुमार श्रीवास्तव की याचिका पर हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा था कि बर्खास्तगी के संबंध में बनी नियमावली का पालन किए बिना ही पुलिसकर्मी किस नियम के तहत हटाए जा रहे हैं। आए दिन इस तरह केस सामने आने पर कोर्ट ने यह भी कहा था कि अब समय आ गया है कि इस प्रथा को हमेशा के लिए खत्म किया जाए। तब कोर्ट ने प्रमुख सचिव (गृह) को तलब भी किया था।