सहारनपुर में जातीय हिंसा के बाद यूपी में हाई अलर्ट, एक की मौत, 20 घायल, धरना-प्रदर्शन पर रोक

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सहारनपुर में आज मायावती के दौरे के पहले और बाद में दलितों और राजपूतों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें 20 लोग घायल हो गए जिनमें से बाद में एक व्यक्ति की मौत हो गई. एक महीने के अंदर सहारनपुर में यह हिंसा की तीसरी घटना है. पिछले दिनों सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में डॉ आंबेडकर की मूर्ति लगाने को लेकर विवाद हुआ था. दलितों का आरोप है कि राजपूतों ने मूर्ति नहीं लगाने दी. बाद में जब राजपूत महाराणा प्रताप जयंती पर जुलूस निकल रहे थे तो दलितों ने उसका विरोध किया था.

आज बसपा प्रमुख मायावती के शब्बीरपुर गांव पहुंचने से पहले दोनों पक्षों में संघर्ष हुआ जिसमें कुछ घरों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई. बाद में मायावती के जाने के बाद कुछ लोगों ने वहां से लौट रहे बसपा समर्थकों की गाड़ी पर हमला कर दिया.गाड़ी में सवार लोगों को मारा और गाड़ी तोड़ दी. इस वारदात में सात लोग घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. बाद में इनमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई. बसपा के समर्थक अस्पताल के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. मौके पर जिले के वरिष्ठ अफसर मौजूद हैं. वहां बड़े पैमाने पर फोर्स की तैनाती कर दी गई है. साथ में रैपिड एक्शन फोर्स भी लगा दी गई है. मेरठ से एडीजी आनंद कुमार सहारनपुर रवाना हो गए हैं.

मायावती शब्बीरपुर लगभग साढ़े तीन बजे पहुंचीं.मायावती ने मीडिया से बात की और बताया कि “सभी लोगों को शांति बनाकर रहना चाहिए, दलितों और ऊंची जाति के लोगों को. क्योंकि लोग राजनीति करके अपने घर चली जाते हैं, आप लोगों को यहीं रहना है. मेरी लोगों से बात हुई कि वे एक मूर्ति आम्बेडकर साहब की लगाना चाहते थे, लेकिन डीएम और एसएसपी ने इसकी परमीशन नहीं दी. हमने, लोगों ने डीएम व एसएसपी की बात मान ली. फिर महाराणा प्रताप जयंती आई. उसकी भी परमीशन उनके पास नहीं थी. हमारे लोगों ने एसएसपी व डीएम को कॉल किया लेकिन कोई नहीं आया और झगड़ा हुआ. यह सारी लापरवाही प्रशासन व पुलिस की है. उससे भी ज्यादा सूबे की सरकार योगी की है, क्योंकि जो आदेश आदेश ऊपर से मिलता है वही डीएम, एसएसपी करते हैं. मेरी चार बार हुकूमत रही लेकिन कभी कोई दंगा नहीं हुआ.”

सहारनपुर में जातीय हिंसा के बाद प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। जिलों के डीएम, एसएसपी को जातीय रैलियों, आंदोलन, धरना-प्रदर्शन की इजाजत नहीं देने का निर्देश है।सहारनपुर में फिर उपद्रव भड़कने के बाद सरकार ने मेरठ जोन के एडीजी, मुजफ्फरनगर के एसएसपी को सहारनपुर भेजा है। पीएसी और आरएएफ की टुकडिय़ां रवाना की गई हैं। उल्लेखनीय है कि आज सहारनपुर के शब्बीरपुर में मायावती के कार्यक्रम के बाद बडग़ांव क्षेत्र जातीय हिंसा की जबर्दस्त चपेट में आ गया है। कई गांव हिंसा की लपटों में घिरकर धधक उठे हैं। हिंसा में 20 से अधिक लोग घायल है। एक ने दम तोड़ दिया है। हालात काबू में नहीं हैं।

कई दिनों से सुलह रहे सहारनपुर में आज फिर हिंसा भड़कने से नाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी को तलब कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद प्रदेश के सभी डीएम, एसएसपी को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश भेजा गया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि जातीय रैलियों, धरना प्रदर्शन और आंदोलन की किसी भी कीमत पर इजाजत नहीं दी जाए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में तैनात अधिकारियों को सड़कों पर गश्त करने की हिदायत दी गई और अतिरिक्त सुरक्षा बरतने का निर्देश भेजा गया है।

प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि सचिव (गृह) मणि प्रसाद मिश्र, एडीजी (कानून व्यवस्था) आदित्य मिश्र, आइजी एसटीएफ अमिताभ यश, डीआइजी सुरक्षा विजय भूषण को विशेष विमान से सहारनपुर भेजा गया है। मेरठ जोन के एडीजी को वही कैम्प करने को कहा गया है। मुजफ्फरनगर के एसएसपी को सहारनपुर में तैनात किया गया है। पांच कंपनी अतिरिक्त पीएसी और दो कंपनी आरएएफ मौके पर भेजी गई है। इन अधिकारियों को जातीय हिंसा पर अंकुश की कार्रवाई की गई है।

सचिव गृह के नेतृत्व में भेजा गया अधिकारियों का दल ङ्क्षहसा नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने के साथ ही यह भी तय करेगा कि जातीय ङ्क्षहसा के लिए जिम्मेदार कौन है। प्रशासन और पुलिस ने जो कदम उठाये वह प्रभावी थे। इन अधिकारियों की रिपोर्ट में जिस भी अधिकारी को दोषी पाया जाएगा, उन सभी के खिलाफ कार्रवाई तय है।