यहां के मुसलमान अरब, पाकिस्तान, में रह रहे मुसलमानों से अच्छी जिंदगी में, हमारी उदारता हमारी दुर्बलता नहीं

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पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि सोमनाथ भगवान की शैली में अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए सरकार को पूर्ण रूप से अधिकृत किया गया है लेकिन कुछ समय पहले भाजपा के अध्यक्ष रह चुके एक नेता कह चुके हैं कि भाजपा अयोध्या में राममंदिर निर्माण नहीं चाहती। राममंदिर के आस-पास मस्जिद निर्माण की बात करने वालों को यह बात समझ लेनी चाहिए कि यह भारत विभाजन जैसा सरदर्द होगा और उसी तरह मुसीबत बन जाएगा जिस तरह पाकिस्तान पूरे विश्व के लिए मुसीबत बना है।

एक निजी शिक्षण संस्थान में पत्रकारों से वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि हमने तीन मुस्लिम राष्ट्रपति दिए एक उपराष्ट्रपति मुस्लिम है। यहां के मुसलमान अरब, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इराक में रह रहे मुसलमानों से अच्छी जिंदगी जी रहे हैं लेकिन हमारी उदारता को हमारी दुर्बलता नहीं समझा जाना चाहिए। जो राजनेता मस्जिद और मुसलमानों की बात करते हैं उनके बारे में मुसलमानों को यह भी सोचना होगा कि जो अपने रामलला के नहीं हुए वह मुसलमानों के क्या होंगे? शंकराचार्य ने कहा कि स्वतंत्र भारत में हिंदू दूसरे दर्जे का नागरिक बनकर रह गया है। दूसरे पक्ष को यह बात समझनी होगी कि हिंदूओं में हर व्यक्ति कायर उत्पन्न नहीं होता। ऐसी परिस्थिति न आए कि हमें अपनी विचार धारा बदलनी पड़े। संसद में कांग्रेस या भाजपा कोई भी प्रस्ताव लाए दोनों मिलकर पारित कर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करें।

शंकराचार्य ने कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि मध्यप्रदेश की सरकार को किसानों की समस्याओं को सुनने में क्या आपति थी? जब उचित मांग नहीं मानी जाती है तो लोग उग्र होते हैं। अब गोली चलाने के बाद कह रहे हैं कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। यह बातचीत पहले भी तो हो सकती थी।

शंकराचार्य ने कहा कि ईश्वर अल्लाह तेरे नाम की बात सिर्फ हिंदू ही कर सकते हैं। क्या किसी मुसलमान ने इसे अपनाया ? यह हो भी नहीं सकता इसलिए तुम्हारा अल्लाह तुम्हारे पास, हमारा ईश्वर हमारे पास। उन्होंने कहा कि बौद्धों के शासन काल में अहिंसा के नाम पर मुर्दों के चीडफ़ाड़ पर भी रोक लग गई थी। अंग्रेजों ने हमारी चरक संहिता पढ़ी और सर्जरी सीख ली।

शंकराचार्य ने कहा कि बिना बुद्धिजीवी और श्रमजीवियों के तालमेल के देश तरक्की के रास्ते पर नहीं जा सकता। तालमेल होता तो किसान आत्महत्या नहीं करते। सवर्ण और असवर्ण में अंग्रेजों ने हमें बांटा। सृष्टि संग्रह और अनुग्रह पर चलती है।