आगरा में थैलेसीमिया से पीडि़त बच्ची के इलाज के लिए पीएम मोदी से मांगी मदद

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आगरा के एक परिवार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पांच वर्ष की थैलेसीमिया से पीडि़त बच्ची के इलाज के लिए मदद मांगी है|
काफी समय से बच्ची का इलाज करा रहे परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है। इनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर जरुरतमंद लोगों की मदद करते रहते हैं, अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने असम की एक बच्ची को तत्काल प्रभाव से मदद भिजवाई थी|
ताजनगरी आगरा के एक परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख अपनी बीमार बच्ची के लिए मदद मांगी है। आर्थिक रूप से कमजोर हो चुके परिवार ने प्रधानमंत्री मोदी से बच्ची के इलाज के लिए मदद की गुहार लगायी है। बच्ची की उम्र पांच साल है और उसका नाम बेबो है|
बच्ची के माता-पिता का कहना है कि, उनकी समस्या है कि वो बच्ची के इलाज का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं। साथ ही माता-पिता को पूरा भरोसा भी है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी बच्ची के इलाज के लिए उनकी मदद जरुर करेंगे। बेबो के पिता संतोष ड्राइवर हैं और गरीबी की वजह से इलाज नहीं हो पा रहा है। बेबो को महीने में दो बार खून की बोतल चढ़ाई जाती हैं, जो बेहद खर्चीला है। घर में जो कुछ बचा था, वह सब बेबो के इलाज में लग गया। अब संतोष के पास बेटी के इलाज के लिए कुछ भी नहीं बचा है|
क्या है थैलेसीमिया
थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें रोगी के शरीर में लाल रक्त कण और हीमोग्लोबिन सामान्य से कम होता है। किसी को भी थैलासीमिया रोग होने के बाद शरीर में हीमोग्लोबिन की निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ी पैदा हो जाती है। जिसके कारण शरीर में खून की कमी के लक्षण उभरने लगते हैं। इसके साथ ही इस समस्या में शरीर को भारी खून की कमी का सामना भी करना पड़ता है। जिसके चलते रोगी को बार-बार खून चढ़ाये जाने की आवश्यकता होती है। आमतौर पर इस रोग की पहचान तीन माह की आयु के बाद ही होती है|
पूरे शरीर में ऑक्सीजन का परिवहन करने के लिए हीमोग्लोबिन नाम के प्रोटीन की जरूरत होती है और यदि यह न बने या सामान्य से कम हो, तो बच्चे की थैलेसीमिया रोग से ग्रसित होन की आशंका अधिक रहती है, जिसका खून की जांच के बाद ही पता चल सकता है। खून की कमी से शरीर में लौह अधिक मात्रा में बनने लगता है, जो हार्ट, यकृत और फेफड़ों में पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है। थैलेसीमिया मेजर में रोगी को कई बार खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है, जबकि माइनर एक तरह से थैलेसीमिया जीन के वाहक का काम करता है। इसलिए शादी के दौरान खून की जांच के जरिए पता चल सकता है कि पार्टनर में थैलेसीमिया जीन का वाहक है या नहीं|