हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में भारत और अफगानिस्तान ने पाक को सुनाई खरी-खरी

9
SHARE

अमृतसर में रविवार को समाप्त हुए हार्ट ऑफ एशिया बैठक के दौरान और बैठक के बाद जारी घोषणापत्र में जितने कड़े शब्दों में पाकिस्तान को हिदायत दी गई है उसे पूरी तरह अनसुना करना बहुत आसान नहीं होगा। दो सबसे अहम पड़ोसी अब पाकिस्तान के खिलाफ पूरी तरह से न सिर्फ लामबंद है बल्कि उसके आतंकी चेहरे को बेनकाब करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।पीएम नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज की जोर आजमाईश के बावजूद अमृतसर घोषणापत्र में पाकिस्तान में फल फूल रहे आतंकी संगठनों जैश व लश्कर के नाम को शामिल किया गया है। स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में पाक किस तरह से अलग थलग पड़ रहा है। हाल के दिनों में पाकिस्तान को इस तरह के कूटनीतिक शर्मिंदगी का सामना बहुत ही कम बार करना पड़ा है|

हार्ट ऑफ एशिया बैठक का शुभारंभ पीएम नरेंद्र मोदी और अफगान राष्ट्रपति अशरफ घनी ने संयुक्त तौर पर किया। मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आतंकी हिंसा करने वाले समूहों के खिलाफ ही नहीं और बल्कि इन्हें वित्तीय मदद करने वाले, इन्हें आश्रय देने वाले देशों के खिलाफ भी हमें कार्रवाई करने की जरुरत है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की जगह बैठक का संचालन कर रहे वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने शुरुआती भाषण में कहा कि किसी भी देश को किसी भी आधार पर आतंक का समर्थन करने की छूट नहीं होनी चाहिए|

भारत इस सम्मेलन का आयोजनकर्ता देश था इसलिए मोदी ने पाकिस्तान के खिलाफ इससे ज्यादा कड़े शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन अफगानिस्तान के राष्ट्रपति घनी के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं थी। घनी ने पाकिस्तान के खिलाफ हाल के महीनों के सबसे बड़ा हमला करते हुए कहा कि उसने अफगानिस्तान के खिलाफ एक तरह से अघोषित युद्ध छेड़ रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकी संगठन भी मानते हैं कि अगर उन्हें पाकिस्तान से मदद नहीं मिले तो वे एक महीना भी टिक नहीं सकेंगे।

मोदी का समर्थन करते हुए घनी ने कहा कि पाक के समर्थन से चल रहे आतंकी समूहों की गतिविधियों की जांच अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से करवाई जानी चाहिए क्योंकि पाकिस्तान इनमें अपनी भूमिका से इनकार करता है। घनी ने पाकिस्तान की तरफ से दी जाने वाली 50 करोड़ डॉलर की मदद का जिक्त्र करते हुए कहा कि बेहतर होगा कि वह इस राशि का इस्तेमाल अपने यहां के आतंकी संगठनों के खात्मे के लिए करे। भारतीय कूटनीति के लिए अहम सफलता यह रही कि हार्ट ऑफ एशिया बैठक के बाद जारी अमृतसर घोषणापत्र में अफगानिस्तान के लिए सिरदर्द बने आतंकी संगठनों के साथ ही भारत को निशाने बनाने वाले आतंकी सगंठनों लश्कर-ए-तैय्यबा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम भी शामिल किया गया|