हार्ट ऑफ एशिया में भारत और अफगानिस्तान के बीच बाइलेट्रल मीट हुई

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नरेंद्र मोदी ने अफगानी प्रेसिडेंट डॉ. अशरफ गनी के साथ मुलाकात की। हार्ट ऑफ एशिया में भारत और अफगानिस्तान के बीच बाइलेट्रल मीट हुई। दोनों देशों के बीच सिक्युरिटी, स्टैबिलिटी के अलावा ट्रेड के मुद्दे पर चर्चा हुई। समझा जा रहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड के लिए एयर कॉरिडोर बनाने पर बातचीत हुई|
भारत अफगानिस्तान के साथ कारोबार के लिए दिल्ली-काबुल के बीच रोड कॉरिडोर बनाने की कोशिश में था।यह रास्ता पाकिस्तान से होकर गुजरता। इसलिए पाकिस्तान ने इस पर आपत्ति जताई।इस कॉरिडोर के बनने से भारत न केवल काबुल बल्कि अफगानिस्तान से सटे देशों से भी कारोबारी रिश्ते बेहतर कर सकता था। पाकिस्तान के एतराज के बाद भारत ने एयर कॉरिडोर का तरीका निकाला। समझा जा रहा है कि दोनों देशों के डेलिगेशन के बीच हार्ट ऑफ एशिया में बाइलेट्रल मीट के दौरान चर्चा हुई।इसमें एयर कार्गो कॉरिडोर पर बात हुई|
शनिवार देर शाम मोदी ने हार्ट ऑफ एशिया में आए चार देशों के फॉरेन मिनिस्टर्स से मुलाकात की।इसमें पाक के फॉरेन एडवाइजर और नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज भी शामिल थे।मोदी ने इस मुलाकात के दौरान कहा कि अफगानिस्तान और इस रीजन में स्थिरता के लिए आतंकवाद और हिंसा का खात्मा जरूरी है।मीटिंग में अजीज के अलावा किर्गिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और स्लोवाकिया के मिनिस्टर्स शामिल थे।मोदी-अजीज की मुलाकात जरूर हुई लेकिन दोनों देशों के बीच बाइलेट्रल टॉक की उम्मीद कम है|
हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रॉसेस 2011 में शुरू की गई थी।इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अजरबैजान, चीन, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, सउदी अरब, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और यूएई शामिल हैं।इस प्लेटफॉर्म का मकसद अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी देशों के बीच इकोनॉमिक, पॉलिटिकल और सिक्युरिटी को लेकर आपसी सहयोगी बढ़ाना है। कनाडा, डेनमार्क, इजिप्ट, फ्रांस, फिनलैंड, जर्मनी, इराक, इटली, जापान, नॉर्वे, पोलैंड, स्पेन, स्वीडन, ब्रिटेन और अमेरिका ने इस पहल का सपोर्ट किया है|