जीएसटी पर बढ़ते कदम

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जीएसटी दरों पर सहमति बनने से यह भरोसा और पुख्ता हुआ है कि पूरे भारत को समान बाजार बनाने के मकसद से लाई जा रही ये कर व्यवस्था अगले वित्त वर्ष के आरंभ से लागू हो जाएगी।

केंद्र और राज्य इस पर सहमत हो गए कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत चार दरें रहेंगी। इससे कॉर्पोरेट सेक्टर के कुछ हिस्सों को जरूर निराशा हुई है, लेकिन ध्यानार्थ है कि सरकारों को सबके हितों का ख्याल रखना होता है। चीजें महंगी ना हों, राजकोष में आमदनी कम-से-कम अभी जितनी बनी रहे और साथ ही परोक्ष कर ढांचा सरल हो, ये तीनों मकसद साधना जटिल काम है। तो इस चुनौती से वाकिफ जीएसटी परिषद ने 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चारस्तरीय कर ढांचे को आखिरकार मंजूरी दे दी। परिषद की पिछली बैठक में केंद्र ने ये दरें 6, 12, 18 और 26 प्रतिशत रखने का प्रस्ताव रखा था। इसमें बीच की दो दरें तो वही रहीं, मगर न्यूनतम दर पांच प्रतिशत और अधिकतम 28 फीसदी रखने पर सहमति बनी। इससे जहां निम्न आय वर्ग के लोगों को राहत मिलेगी, वहीं तंबाकू जैसे नशीले पदार्थ या एसयूवी जैसे प्रदूषक वाहनों का उपयोग महंगा होगा। सामान्य उपभोग की ज्यादातर वस्तुओं पर 5 प्रतिशत कर लगेगा। इन वस्तुओं को सस्ता रखने की कोशिश के पीछे एक मकसद मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना भी है। जबकि खाद्यान्न् जैसी अति-आवश्यक वस्तुओं को शून्य कर के दायरे में रखा गया है। इसके विपरीत आलीशान कारें, तंबाकू, पान मसाला, ठंडे पेय जैसे पदार्थ अगर महंगे होंगे, तो उस पर किसी को एतराज नहीं होगा।

बहरहाल, उपकर (सेस) का चलन जारी रहना जरूर समस्याग्रस्त है। हालांकि रजामंदी हुई कि तमाम सेस की जीएसटी परिषद हर साल समीक्षा करेगी, लेकिन बेहतर होता कि जीएसटी लागू होने के साथ जब चाहे उपकर लगा देने की प्रवृत्ति खत्म हो जाती। अब इंतजार उस विस्तृत सूची का है, जिससे जाहिर होगा कि असल में कौन-सी वस्तु किस कर श्रेणी में आएगी। सेवाओं को लेकर साफ संकेत हैं कि इन्हें 18 प्रतिशत की श्रेणी में रखा जाएगा। इसका अर्थ यह हुआ कि फोन, बीमा, रेस्तरां में खाना आदि महंगा होगा। इसकी चुभन मध्य वर्ग को महसूस होगी।

फिलहाल एक बड़ा अनुसुलझा मुद्दा स्वर्ण पर लगाने वाले टैक्स का है। सोने पर केंद्र ने चार प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का प्रस्ताव किया है, मगर उस पर सहमति नहीं है। स्वर्ण अपने देश में बड़ा कारोबार है। आशा है इस पर जीएसटी की दर तय करने से पहले इससे जुड़े तमाम पहलुओं पर गौर किया जाएगा। जीएसटी पर अमल के लिए केंद्रीय जीएसटी और एकीकृत जीएसटी कानून अभी संसद से पारित होने हैं। मगर जीएसटी परिषद में सहयोग की जैसी भावना दिखी, उसके मद्देनजर ये काम मुश्किल नहीं लगता। अब यह भरोसा और पुख्ता हुआ है कि पूरे भारत को समान बाजार बनाने के मकसद से लाई जा रही ये कर व्यवस्था अगले वित्त वर्ष के आरंभ से लागू हो जाएगी। यह एक बड़ी सफलता है और इसके लिए केंद्र और तमाम राज्यों की सरकारें तथा सभी राजनीतिक दल बधाई के पात्र हैं।