वॉट्सऐप पर रोक लगाए सरकार: सैफुल्लाह के पिता

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7 मार्च को लखनऊ के ठाकुरगंज में एनकाउंटर के दौरान मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के पिता मोहम्मद सरताज ने कहा- सरकार को वॉट्सऐप जैसी चीजों पर फौरन रोक लगानी चाहिए|
सैफुल्लाह के पिता सरताज ने एक चैनल से बातचीत में कहा, “बेटे से हमें भी प्रेम था। हमें नहीं पता था कि उसका ब्रेन वॉश हो रहा था। एक दिन हमने उसे डांटा। वो नाराज हो गया। शाम को जब मैं घर लौटा तो पता लगा कि वो घर छोड़कर चला गया। मैंने बड़े लड़के से कहा कि अब तुम्हारे ऊपर घर की जिम्मेदारी है। ढाई-तीन महीने तक उसका कोई फोन नहीं आया। इसी वक्त में वो बिगड़ा। किसने उसे गुमराह किया, किसकी संगत में इस दौरान वो रहता रहा, ये हमें समझ नहीं आया|”
आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता
– सैफुल्लाह के पिता ने एक सवाल पर कहा, “आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता। फिर चाहे वो हिंदू परिवार से हो या मुस्लिम परिवार से। बचपन से नजर रखें तो बच्चों बचाया जा सकता है। उसके पास जो मोबाइल था, उसमें स्क्रीन नहीं थी। वो सिर्फ बटन दबाता रहता था। एक बात मैं जरूर कहना चाहता हूं कि मोबाइल पर वॉट्सऐप वगैरह की वजह से बच्चे गलत संगत में पड़ जाते हैं। मैं भारत सरकार से मांग करता हूं कि वो इस तरह की चीजों पर फौरन रोक लगाए|”
हमारे घर में ऐसी तालीम नहीं दी जाती
– सरताज ने कहा, “सैफुल्लाह किसी का भी मोबाइल उठा लेता था। दानिश हमारे बड़े भाई का लड़का था। हमारे घर में इस तरह की तालीम नहीं दी जाती थी। वो ढाई-तीन महीने घर से बाहर रहा और इस दौरान ही बिगड़ा।”
– “लैपटॉप में सारे गाने सुनता था। हमने भी उसे ऐसा करते देखा था। जिस वक्त मैं लौट के आया तो पता लगा कि वो चला गया है। भाई से कह के गया था कि अब कभी लौट के नहीं आएगा।”
– राजनाथ द्वारा संसद में तारीफ किए जाने के सवाल पर सरताज ने कहा, “हम उनके शुक्रगुजार हैं। देश के रक्षा मंत्री (गलती से राजनाथ को होम मिनिस्टर की जगह डिफेंस मिनिस्टर कहा) हमें सलाम करते हैं। वो महान आदमी हैं, जिन्होंने हम जैसे छोटे आदमी को सलाम किया। हम उनके शुक्रगुजार हैं|”
राजनाथ ने संसद में क्या कहा था?
– लोकसभा में एमपी ट्रेन ब्लास्ट और लखनऊ एनकाउंटर पर राजनाथ सिंह ने बयान दिया।
– कहा कि मामले की जांच एनआईए करेगी। उन्होंने सैफुल्लाह के पिता के बयान का हवाला भी दिया। कहा- सरकार को उन पर नाज है। बता दें कि सरताज ने अपने बेटे की लाश लेने से मना कर दिया है।
– राजनाथ ने कहा, “जब उत्तर प्रदेश पुलिस सैफुल्लाह के पिता सरताज से मिली और उसकी लाश को सौंपने की बात कही, तब उसके पिता ने कहा- जो देश का न हुआ, मेरा कैसे हो सकता है? उसने कोई सही काम तो किया नहीं। मुझे उसका मरा हुआ मुंह तक नहीं देखना है। मैंने पूरी जिदंगी मेहनत की और परिवार को पाला है। लेकिन सैफुल्लाह ने मुझे शर्मिन्दा कर दिया। हर किसी के लिए देश पहले है। वह देश का नहीं हो सका, इसलिए वह मेरा भी नहीं हो सकता है|”
लखनऊ में क्या हुआ था?
– 7 मार्च की सुबह एमपी के शाजापुर में भोपाल-पैसेंजर ट्रेन में IED ब्लास्ट हुआ। इसमें 10 लोग घायल हुए। इसे देश में मौजूद ISIS मॉड्यूल का पहला हमला माना गया।
– ब्लास्ट के बाद उसी दिन दोपहर को एमपी पुलिस ने पिपरिया के एक टोल नाके से बस रोककर चार सस्पेक्ट पकड़े। इनकी गिरफ्तारी के बाद कानपुर से दो और इटावा से एक संदिग्ध अरेस्ट हुआ।
– इन संदिग्धों से मिली इन्फॉर्मेशन और इंटेलिजेंस इनपुट के बाद यूपी एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में एक घर को घेर लिया। यहां अाईएसआईएस का संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह छिपा बैठा था। उसकी उम्र 22 से 23 साल के बीच थी। वह कानपुर का रहने वाला था।
– उसने सरेंडर करने से मना कर दिया। 11 घंटे चले एनकाउंटर के बाद उसे मार गिराया गया। उसके घर से 8 रिवॉल्वर, 650 कारतूस, कई बम और रेलवे का मैप मिला।
– एनकाउंटर के बाद उसके पिता ने शव लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि बेटे ने देश से गद्दारी की। गद्दारी करने वाले का पिता कहलाने में मुझे जिल्लत महसूस होती है|