पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का निधन

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पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का लंबी बीमारी के बाद आज दिल्ली में निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे और दिल्ली में उन्होंने सुबह 7 बजे आखिरी सांस ली। जॉर्ज फर्नांडिस पिछले कई सालों से अल्झाइमर नाम की बीमारी से पीड़ित थे और उन्हें चीजें याद नहीं रहती थीं। इसके अलावा हाल में उन्हें स्वाइन फ्लू होने की बातें भी सामने आ रही हैं।

जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है कि जॉर्ज फर्नांडिस एक निर्भीक, निडर और दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में बड़ा योगदान दिया। वह गरीबो और हाशिये पर पड़े लोगों के लिए सबसे प्रभावी ढंग से आवाज उठाने वाले लोगों में से थे। उनके निधन से दुखी हूं।

जॉर्ज फर्नांडिस, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे थे। रक्षा मंत्रालय के अलावा उन्होंने रेल और उद्योग मंत्रालय जैसे कई अहम विभाग भी संभाले थे। आखिरी बार वो अगस्त 2009 से जुलाई 2010 के बीच तक राज्यसभा सांसद रहे थे।

3 जून 1930 को कर्नाटक में जन्मे जॉर्ज फर्नांडिस 10 भाषाओं के जानकार थे। वह हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तुलु, कोंकणी और लैटिन भाषा के जानकार थे। उनकी मां किंग जॉर्ज पंचम की बड़ी प्रशंसक थीं और उन्हीं के नाम पर अपने छह बच्चों में से सबसे बड़े का नाम उन्होंने जॉर्ज रखा था।

जार्ज फर्नांडिस को इमर्जेंसी के दौरान गिरफ्तारी से बचने के लिए पगड़ी पहन और दाढ़ी रख कर सिख का भेष धारण करना पड़ा था। गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में कैदियों को वह गीता के श्लोक सुनाते थे। 1974 की रेल हड़ताल के बाद वह कद्दावर नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने बेबाकी के साथ इमर्जेंसी लगाए जाने का विरोध किया था। इमर्जेंसी खत्म होने के बाद फर्नांडिस ने 1977 का लोकसभा चुनाव जेल में रहते हुए ही मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से लड़े और रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की।

जॉर्ज जनता पार्टी की सरकार में उद्योग मंत्री बनाए गए थे। बाद में जनता पार्टी टूटी, फर्नांडिस ने अपनी पार्टी समता पार्टी बनाई और बीजेपी का समर्थन किया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के वह राजनीतिक गुरु कहे जाते थे।