सपा-बसपा के बीच ऐसे होगा सीटों का बंटवारा, कांग्रेस से किनारा

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आगामी लोकसभा चुनावों के लिए यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन की चर्चाएं पिछले कई महीनों से चल रही हैं, लेकिन अब खबर है कि सपा-बसपा ने गठबंधन को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। खबरों के मुताबिक यूपी की 80 लोकसभा सीटों के बंटवारे का फॉर्म्युला ऐसे तय हुआ है कि एसपी और बीएसपी लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी और तीन सीटें अजित सिंह की राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को वेस्ट यूपी में मिल सकती हैं।

जी हां इस गठबंधन में कांग्रेस के लिए कोई जगह नहीं है, फिर भी अगर कांग्रेस गठबंधन में शामिल होती ही है तो ऐसी स्थिति में उसे सिर्फ दो सीटें दी जाएंगी। जाहिर है तीन राज्यों में जीत के बाद कांग्रेस इस स्थिति के लिए तैयार रहीं होगी तो ऐसी स्थिति में सपा-बसपा केंद्र में भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए कांग्रेस को रायबरेली और अमेठी में वॉकओवर दे देंगी यानी वहां से गठबंधन का प्रत्याशी नहीं होगा। बाकी जगह कांग्रेस मुकाबले में होगी।

रिपोर्ट्स की मानें तो चुनाव पूर्व बसपा और सपा का गठबंधन का आगामी 15 जनवरी को बसपा चीफ मायावती के जन्मदिन पर ऐलान भी हो सकता है। सीटों पर सहमति का जो फॉर्मूला सामने आ रहा है उसके मुताबिक बसपा 38, सपा 37 और आरएलडी को 3 सीटें मिलनी हैं। कांग्रेस को गांधी परिवार की दो परंपरागत सीटें रायबरेली और अमेठी दी जा सकती है, या फिर छोड़ी जा सकती हैं।


दरअसल कांग्रेस के साथ सपा और बसपा जैसे को तैसा वाला व्यवहार कर रही हैं। हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में सपा-बसपा को कोई भाव नहीं दिया क्योंकि इन राज्यों में कांग्रेस मजबूत है। अब यही स्थिति यूपी में है, यहां सपा-बसपा कांग्रेस की तुलना में काफी मजबूत हैं, इसीलिए ये पार्टियां कांग्रेस को किनारे कर रही हैं। इसके अलावा एक धारणा यह भी है कि देखने में आया है कि कांग्रेस से गठबंधन की स्थिति में इन पार्टियों के वोट तो कांग्रेस को ट्रांसफर हो जाते हैं लेकिन कांग्रेस अपने वोट इन पार्टियों को ट्रांसफर नहीं करा पाती। ऐसे में इन दलों को कांग्रेस को साथ लेकर चलने में कोई फायदा नहीं दिखाई दे रहा है।