उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर जारी

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नदियों के जल स्तर में कहीं कमी तो कहीं स्थिर होने के बावजूद बाढ़ का पानी कहर बरपा रहा है। सैकड़ों बीघा फसल या तो कटान से या फिर खेतों में पानी भरने के चलते तबाह हो चुकी हैं और यह क्रम बदस्तूर है। तटीय क्षेत्रों के हालात ज्यादा बदतर हैं। सुरक्षित स्थानों की ओर लोगों का पलायन जारी है। अधिकांश नदियां लाल निशान के पार बह रही हैं।

बुधवार को घाघरा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद बाराबंकी में नदी का जलस्तर 20 सेंटीमीटर और गोंडा व बहराइच में 28 सेंटीमीटर खतरे के निशान से ऊपर रहा। फतेहपुर व रामनगर तथा सिरौली गौसपुर तहसील क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों की खेती घाघरा की धारा में समाती जा रही है।

बहराइच में घाघरा का जलस्तर स्थिर रहा। इसके बावजूद एल्गिन ब्रिज पर घाघरा खतरे के निशान से 28 सेमी ऊपर बह रही है। इससे एक दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। यहां कटान होने से गोलागंज में 10 बीघा जमीन व एक मकान नदी में समा गया।

ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। लखीमपुर में बैराज से शारदा में एक लाख 26 हजार 629 क्यूसेक व घाघरा में एक लाख तीन हजार 367 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदियों का जलस्तर बढ़ गया।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार अयोध्या में सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र चार सेंटीमीटर नीचे है। इससे तटवर्ती इलाकों में दहशत है। गोंडा में सरयू के जलस्तर में इजाफा होने के साथ घाघरा नदी में पानी कम हुआ है।

एल्गिन ब्रिज पर घाघरा खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इससे एल्गिन-चरसड़ी तटबंध पर नकहरा गांव के पास तेजी से कटान हो रहा है। कर्नलगंज क्षेत्र के 73 मजरे बाढ़ की चपेट में हैं।

source-DJ