अवैध खनन पर पांच साल की जेल, 20 गुना जुर्माना

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लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट की सातवीं बैठक में यह फैसला हुआ। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में अवैध खनन पर अंकुश लगाने का वादा किया था। नई व्यवस्था के तहत प्रति हेक्टेयर अवैध खनन पर 25 हजार रुपये के जुर्माने की राशि बढ़ाकर पांच लाख कर दी गई। इसी तरह छह माह के सजा के प्रावधान को बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया।

अवैध खनन पर जहां कैबिनेट ने सख्ती दिखाई है, वहीं घरेलू उपयोग और मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए किए जाने वाले खनन में रियायत भी दी गई है। पिछली सरकार में रायल्टी के अलावा प्रीमियम एमाउंट देने की व्यवस्था थी जिसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। कैबिनेट ने कोर्ट के फैसले के अनुरूप इसे रद कर दिया है।

कैबिनेट ने ईंट भट्ठा मालिकों के हक में भी एक अहम फैसला किया है। ईंट भट्ठा मालिकों को खनिज रायल्टी जमा करने में देरी होने पर पहले 24 फीसद ब्याज देना होता था। कैबिनेट ने इसे कम करते हुए 18 फीसद ब्याज निर्धारित किया है।

खान माइनिंग प्लान बनाने के लिए कैबिनेट ने योग्यता निर्धारित की है। पहले नियम के अनुसार भारतीय खान ब्यूरो से मान्यता प्राप्त संस्थान ही इसके लिए अधिकृत थे। अब विश्वविद्यालयों से माइनिंग इंजीनियङ्क्षरग के डिग्रीधारक और भूतत्व विषय से पोस्ट ग्रेजुएट भी इसके लिए योग्य माने जाएंगे। हालांकि इसके लिए पांच वर्ष का अनुभव जरूरी होगा।

कैबिनेट ने प्रमाणित बीजों पर अनुदान देने की योजना के तहत धान, गेहूं, जौ एवं तिल फसलों के बीजों पर प्रोत्साहन के लिए किसानों को उन्नतिशील प्रजातियों पर विशेष अनुदान दिए जाने का फैसला किया है। पहले से चली आ रही इस व्यवस्था को एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया है। इस पर करीब 32 करोड़ रुपये खर्च आएंगे। दरअसल, केंद्र के साथ प्रदेश सरकार की भी मंशा पांच साल में किसानों की आय दोगुना करने की है। उपज बढ़ाने में बीज की 20-25 फीसद भूमिका होती है।

कैबिनेट ने धान, गेंहू, जौ, तिलहन और अन्य फसलों के प्रमाणित बीजों पर विशेष अनुदान देने का निर्णय लिया है। सरकार की मंशा है कि किसान परंपरागत प्रजातियों की जगह अधिक उपज देने वाली और प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी प्रजाति के बीजों का प्रयोग करें। इसके लिए इन पर जहां विशेष अनुदान दिया जाएगा, वहीं दस साल से पुरानी प्रजातियों पर अनुदान की राशि क्रमश: खत्म की जाएगी।