शाम 5.40 से रात 10.1 तक रहेगा सूयज़् ग्रहण, जानिए क्या होगा असर

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साल का पहला सूयज़् ग्रहण रविवार को होगा। सूयज़् ग्रहण शाम 5:40 बजे शुरू होगा और रात 10:01 बजे तक रहेगा। इस सूयज़् ग्रहण को भारत, दक्षिण अमरीका, दक्षिण अफ्रीका, प्रशांत, अटलांटिक, और हिंद महासागर में देखा जा सकेगा। भारत में इस आंशिक सूयज़् ग्रहण को शाम 6:45 बजे ही देखा जा सकेगा। ग्रहण के तुरंत बाद रात होने की वजह से इसका पूरा नजारा देख पाना मुमकिन नहीं होगा। अमरीका में यह ग्रहण ‘ग्रेट अमरीकन इस्लिप्सÓ के नाम से मशहूर हो रहा है, क्योंकि अमरीकी महाद्वीप से ही पूणज़् सूयज़् ग्रहण का नजारा देख पाना संभव हो सकेगा। ज्योग्राफिकल साइट्स पर इसकी बुकिंग हो गई है। रविवार के सूयज़् ग्रहण के बाद इस वषज़् दो और ग्रहण पड़ेंगे । जिसमें एक चंद्र और दूसरा सूयज़् ग्रहण होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 7-8 अगस्त को हमें भारत में आंशिक चन्द्रग्रहण देखने को मिलेगा। इसे यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया से देखा जा सकेगा। जबकि 21 अगस्त को पूणज़् सूयज़् ग्रहण लगेगा। गौरतलब है कि 8 फरवरी को इस वषज़् का पहला चन्द्र ग्रहण लगा था।

 इसलिए दिखता है सूयज़् ग्रहण?
सूयज़् ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब चन्द्रमा सूयज़् और पृथ्वी के बीच से गुजरती है तो पृथ्वी से देखने पर सूयज़् पूणज़् अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा ढंका हुआ प्रतीत दिखाई देता है। इसे ही सूयज़् ग्रहण कहते हैं।
 तीन प्रकार के होते हैं सूयज़् ग्रहण
सूयज़् ग्रहण तीन तरह के होते हैं। पूणज़् सूयज़्ग्रहण, आंशिक सूयज़्ग्रहण और वलयाकार सूयज़्ग्रहण। पूणज़् और आंशिक सूयज़्ग्रहण का अथज़् नाम से ही स्पष्ट हो जाता है। वलयाकार सूयज़् ग्रहण वो खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी का उपग्रह चांद पूथ्वी से काफी दूर रहने के बावजूद पृथ्वी और सूयज़् के बीच में आ जाता है। इससे पृथ्वी से सूयज़् की जो तस्वीर उभरती है, उसमें सूरज का बीच का हिस्सा भी ढका हुआ नजर आता है। और सूयज़् का बाकी हिस्सा प्रकाशित होने की वजह से सूयज़् की कंगन या वलय के आकार की तस्वीर उभरती है, इसलिए इसे वलयाकार सूयज़्ग्रहण कहते हैं।
नंगी आंखों से सूयज़्ग्रहण देखना है नुकसानदेह
सूयज़् ग्रहण को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। इससे देखने वाले के आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रहण के समय सूयज़् से निकलने वाली हानिकारक किरणें आखों को ज्यादा नुकसान करती हैं। इसलिए सूयज़् ग्रहण देखने के लिए काले धूप वाले चश्मे या एक्सरे की शीट का उपयोग करना चाहिए।
इन मान्यताओं का नहीं है कोई वैज्ञानिक आधार
देश में हिन्दू धमज़् मानने वालों के बीच पाई जाने वाली पुरानी मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा ग्रहण के बाद स्नान को भी आवश्यक बताया गया है। वहीं, गभज़्वती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने और ग्रहण को देखने पर पाबंदी की बात कही गई है। धामिज़्क मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान दान करने से पुण्य मिलता है। हालांकि, इन मान्यताओं के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसके बावजूद कई लोग आज भी मान्यताओं के नाम पर इन नियमों का अनुसरण करते हैं।