प्रेरणादायक, रेत में सब्जी पैदा कर रहे देवरिया के किसान

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कहावत है किसान मेहनत करें तो वे रेत में भी सोना पैदा कर सकता है। यह कहावत जनपद के भागलपुर के किसानों ने चरितार्थ कर दी है। यहां के किसानों ने बालू के रेत को हरे सोने की खदान में बदल दिया है। कठिन परिश्रम के बल पर यहां के किसान मुन्ना, अहमद, पूर्णमासी, हसीना, सुलतान आदि ने सैकड़ों बीघे रेत से भरे खेतों में हरी सब्जी के साथ ककड़ी, खीरा, तरबूज व नाशपाती की खेती कर उन्नति कर रहे हैं।

खुद की कट्ठा भर जमीन न होने के बावजूद भागलपुर गांव निवासी पूर्णवासी और हसीना के अलावा एक दर्जन से ज्यादा किसानों की मेहनत भी रंग ला रही है। मेहनत व जज्बे के बूते यहां के किसान गरीबी को पीछे छोड़कर आर्थिक स्वावलंबन की गाथा लिख रहे हैं। यहां के रेत में बोए गए सब्जियों व फलों को बेचने के लिए इन किसानों को कहीं दूर नहीं जाना पड़ रहा है बल्कि खुद बाहर के व्यापारी यहां नदी के रेत में पहुंचकर थोक के भाव में खरीद ले रहे हैं।

महिला किसान हसीना बताती है कि बालू की रेत में हरी सब्जी पैदा करने की प्रेरणा बड़े काश्तकारों से ही मिली। वह हुंडा पर सब्जी की खेती कर रही थी। खेत मालिकों के उत्पीड़न तथा बार-बार हुंडा की रकम बढ़ाने के चलते काफी परेशान थी। उसके बाद बालू के रेता में खेती करने की तरकीब गाजीपुर के एक किसान से सीखी। इसके बाद धीरे-धीरे खेती के प्रति मन लगने लगा। आय होती गई और बालू के रेता में खेती को बढ़ाने लगी। आज सब्जी की खेती से होने वाले आय से पूरा परिवार खुशहाल है।

भागलपुर के पूर्णमासी कहते हैं कि हम लोगों की नौकरी यही है। मां गंगा के आर्शीवाद से खेती में अच्छा खासा आय होती है। इसी तरह मुन्ना व अहमद भी इस खेती को वरदान मान रहे हैं। तुफानी कहते हैं कि कभी कभी मां गंगा जब नाराज होती है और नदी की धारा सब्जी तथा तरबूज की खेती को डूबो देती है तब बहुत ही नुकसान होता है। गर्मी के मौसम में पंपिंग सेट से पानी चलाना पड़ता है। जनवरी से खेती का कार्य शुरू हो जाता है।

अब फसल तैयार हो गई है। हमारे लिए यही रेत ही सोना है। इतना ही नहीं रेत में सब्जी और फलों की खेती से हो रही अच्छी आय देखकर कई अन्य गांवों के लोग भी खेती करने का मन बना रहे हैं। यदि स्थिति ठीक रही तो अगले साल पूरा रेता क्षेत्र हरा-भरा नजर आएगा।

Source- DJ