प्रशांत किशोर हुए जेडीयू में शामिल, नीतीश हुए मजबूत, आरजेडी-कांग्रेस परेशान

प्रशांत किशोर ने यूपी-पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए काम किया था

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प्रशांत किशोर को तो आप अच्छी तरह से जानते ही हैं। 2012 के गुजरात चुनावों और 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने पीएम मोदी की अगुवाई में बीजेपी के लिए चुनाव प्रबंधन का काम किया और बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के शिल्पी के तौर पर चर्चित हुए। इसके बाद 2015 में उन्होंने नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव को एक करने और महागठबंधन को भारी जीत दिलाते हुए बीजेपी को बुरी तरह परास्त करने का भी काम किया।

प्रशांत कुमार के काम का लोहा लालू ने भी माना था और अपने बेटों को सलाह दी थी कि इनकी बात जरूर मानना। नीतीश के लिए काम करते रहे और एक वक्त बिहार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाए यही प्रशांत किशोर अब आधिकारिक रूप से जेडीयू में शामिल हो गए हैं और अब पर्दे के पीछे से नहीं बल्कि खुल कर जेडीयू के लिए काम करेंगे।

प्रशांत किशोर को आज पटना में जेडीयू में शामिल हो गए। पटना में जेडीयू कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को पार्टी की सदस्यता दिलाई।

प्रशांत किशोर के पिछले कुछ समय से राजनीति में आने की अटकलें लगाई जा रही थी। पिछले दिनों हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनस में एक कार्यक्रम के दौरान प्रशांत ने यह संकेत भी दिया था कि अब वह चुनावों में किसी पार्टी के साथ जुड़कर काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि वह जनता के बीच जाकर काम करना चाहते हैं। पसंद के क्षेत्र के रूप में प्रशांत किशोर ने बिहार और गुजरात का नाम लिया था।

प्रशांत किशोर का जेडीयू में शामिल हो जाना एनडीए खेमे के लिए खुशी की बात है, क्योंकि प्रशांत अब जेडीयू के लिए काम करेंगे तो कहीं ना कहीं इसका फायदा बीजेपी को भी होगा क्योंकि बिहार में अब जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की ही सरकार है। उधर उनका जेडीयू में शामिल हो जाना कांग्रेस के लिए परेशानी की बात है क्योंकि यूपी और पंजाब के विधानसभा चुनावों के दौरान प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के लिए ही काम किया था। इनमें से पंजाब में कांग्रेस भारी बहुमत से जीती थी, जबकि उत्तर प्रदेश कांग्रेस में भी उन्होंने जान फूंक दी थी।

प्रशांत के आ जाने से जेडीयू अब नए जोश से भर गई है। महागठबंधन टूटने के बाद से बीजेपी से गठबंधन करके जेडीयू की अगुवाई वाली बिहार की नीतीश सरकार भले ही मजबूत हो गई थी, लेकिन पार्टी के जनाधार में कमी आने की बात कही जाने लगी थी और उपचुनावों में आरजेडी की जीत से इसको बल भी मिला था, लेकिन प्रशांत किशोर अब अपनी करामाती रणनीतियों हालात बदलने की क्षमता रखते हैं।