EVM पर अब उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग को नहीं भरोसा, पुराने होने का दिया हवाला

13
SHARE

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। ईवीएम मशीन पर इस बार किसी राजनीतिक दल या किसी नेता ने नहीं, बल्कि राज्य निर्वाचन आयोग ने सवाल उठाया है। आयोग ने कहा है कि ईवीएम मशीन काफी पुराने हो गए हैं, इसलिए नगरीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से होने चाहिए।

उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल से जब पूछा गया कि जिस तरह से ईवीएम पर सवाल उठ रहे हैं तो क्या नगरीय निकाय चुनाव में बैलेट पर चुनाव हो सकते हैं। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि 2012 में हमने नगरीय निकाय चुनाव बैलेट पर ही कराए गए थे। बस इसमें महापौर का चुनाव ईवीएम के माध्यम से कराया गया था। अग्रवाल ने कहा कि दरअसल चुनाव आयोग से जो हमें ईवीएम दी जाती है, वह 2006 से पहले की हैं। ईवीएम पुरानी होने के कारण उनमें दिक्कतें आ सकती हैं। हमने केंद्रीय चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मांग की है कि नगरीय चुनाव के लिए अपग्रेड ईवीएम मुहैया कराई जाए।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने जताई असमर्थता
राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने डॉ. जैदी से फोन पर आग्रह किया था कि उत्तर प्रदेश में होने जा रहे नगर निगम के चुनाव चूंकि ईवीएम से होने हैं। लिहाजा उन्हें 2006 के बाद की नई ईवीएम आवंटित की जाएं। इस पर डॉ. जैदी ने असमर्थता जताते हुए कहा कि केन्द्रीय चुनाव आयोग के पास फिलहाल 2006 के बाद की ईवीएम इतनी ज्यादा तादाद में नहीं हैं कि वह इतने बड़े प्रदेश में होने जा रहे नगर निगमों के चुनाव में दी जा सकें। केन्द्रीय चुनाव आयोग द्वारा 2006 के बाद की नई ईवीएम देने से इनकार करने के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त अग्रवाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से कहा कि ऐसी सूरत में उप्र में नगर निगमों के भी चुनाव बैलेट पेपर से ही करवाए जाएंगे
जून-जुलाई में होने हैं नगरीय निकाय चुनाव
संभावना जताई जा रही है कि यदि केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा समय से ईवीएम मशीन उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो संभावना है कि नगरीय निकाय चुनाव में बैलेट पेपर से वोटिंग कराई जाए। मालूम हो कि प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव जून-जुलाई में होने हैं। संभावना जताई जा रही है कि इतनी जल्दी निर्वाचन आयोग ईवीएम मशीन उपलब्ध नहीं करा पाएगा।